हनुमान चालीसा लिरिक्स हिंदी | Hanuman Chalisa Lyrics in Hindi PDF Download
हनुमान चालीसा लिरिक्स हिंदी में पढ़ें। Hanuman Chalisa Lyrics in...
4 Minutes · Jan 1970 · Nandgram Dham
Table of Contents
हनुमान चालीसा क्या है? (What is Hanuman Chalisa?)
हनुमान चालीसा का महत्त्व (Significance of Hanuman Chalisa)
॥ श्री हनुमान चालीसा ॥ — सम्पूर्ण पाठ
हनुमान चालीसा पाठ के लाभ (Benefits of Reciting Hanuman Chalisa)
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हनुमान चालीसा कब और कैसे पढ़ें? (When & How to Recite Hanuman Chalisa)
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (Frequently Asked Questions (FAQ))
हनुमान चालीसा भारत की सबसे प्रिय और व्यापक रूप से पढ़ी जाने वाली भक्ति रचना है। यह 40 चौपाइयों का एक पवित्र स्तोत्र है जो 16वीं शताब्दी में महाकवि गोस्वामी तुलसीदास जी ने रचा था। प्रत्येक मंगलवार और शनिवार को इसका पाठ विशेष रूप से फलदायी माना जाता है।
हनुमान चालीसा क्या है? (What is Hanuman Chalisa?)
"चालीसा" शब्द हिंदी के चालीस (40) से आया है — अर्थात 40 चौपाइयों की रचना। हनुमान चालीसा में दोहे, चौपाइयाँ, और अंतिम दोहा मिलाकर कुल 43 पंक्तियाँ हैं। इसे अवधी भाषा में लिखा गया है — वही भाषा जिसमें रामचरितमानस की रचना हुई।
🔱 हनुमान चालीसा की संरचना
2 प्रारंभिक दोहे (Opening Dohas)
(40 Chaupais — the main body)
1 समापन दोहा (Closing Doha)
रचना: गोस्वामी तुलसीदास (16वीं शताब्दी)
भाषा: अवधी (Awadhi dialect)
हनुमान चालीसा का महत्त्व (Significance of Hanuman Chalisa)
हिंदू धर्म में श्री हनुमान जी को शक्ति, भक्ति, और ज्ञान के अद्वितीय प्रतीक माने जाते हैं। वे राम के सबसे बड़े भक्त और संकट के समय रक्षक हैं। हनुमान चालीसा उनकी महिमा, गुणों और लीलाओं का संक्षिप्त किन्तु सम्पूर्ण वर्णन करती है।
यह स्तोत्र न केवल आध्यात्मिक दृष्टि से, बल्कि मनोवैज्ञानिक दृष्टि से भी अत्यंत लाभकारी है। इसका नियमित पाठ मन में स्थिरता, आत्मबल, और सकारात्मकता का संचार करता है।
॥ श्री हनुमान चालीसा ॥ — सम्पूर्ण पाठ
Hanuman Chalisa Complete Lyrics in Hindi with Meaning
श्रीगुरु चरन सरोज रज, निज मनु मुकुरु सुधारि। बरनउँ रघुबर बिमल जसु, जो दायकु फल चारि॥
अर्थ: अपने सद्गुरु के चरण-कमलों की धूल से अपने मन-दर्पण को निर्मल करके, मैं श्री रामचंद्र जी के निर्मल यश का वर्णन करता हूँ जो चारों फल — धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष — को देने वाला है।
अर्थ: मैं स्वयं को बुद्धिहीन शरीर जानकर श्री पवन पुत्र हनुमान का स्मरण करता हूँ। वे मुझे बल, बुद्धि, और विद्या प्रदान करें तथा मेरे दुख और विकारों को हरें।
॥ चौपाई १ से ४० ॥
॥ चौपाई 1 ॥
जय हनुमान ज्ञान गुन सागर। जय कपीस तिहुँ लोक उजागर॥
अर्थ: ज्ञान और गुण के सागर श्री हनुमान जी की जय हो। तीनों लोकों में आपकी कीर्ति फैली हुई है।
॥ चौपाई 2 ॥
राम दूत अतुलित बल धामा। अंजनि पुत्र पवनसुत नामा॥
अर्थ: आप श्री राम के दूत और अतुलनीय शक्ति के धाम हैं। आपको माता अंजनी के पुत्र और पवनसुत के नाम से जाना जाता है।
॥ चौपाई 3 ॥
महाबीर बिक्रम बजरंगी। कुमति निवार सुमति के संगी॥
अर्थ: आप महान वीर और पराक्रमी हैं। आप कुबुद्धि को दूर करने वाले और अच्छी बुद्धि वालों के साथी हैं।
॥ चौपाई 4 ॥
कंचन बरन बिराज सुबेसा। कानन कुंडल कुंचित केसा॥
अर्थ: आपका वर्ण सोने के समान है। आपके कानों में कुंडल शोभायमान हैं और बाल घुंघराले हैं।
॥ चौपाई 5 ॥
हाथ बज्र औ ध्वजा बिराजै। काँधे मूँज जनेऊ साजै॥
अर्थ: आपके एक हाथ में वज्र और दूसरे में ध्वजा है। आपके कंधे पर जनेऊ शोभा दे रहा है।
॥ चौपाई 6 ॥
संकर सुवन केसरी नंदन। तेज प्रताप महा जग बंदन॥
अर्थ: आप भगवान शिव के अंश और केसरी के पुत्र हैं। आपके तेज की पूरी दुनिया वंदना करती है।
॥ चौपाई 7 ॥
बिद्यावान गुनी अति चातुर। राम काज करिबे को आतुर॥
अर्थ: आप विद्वान और अत्यंत चतुर हैं। आप सदैव श्री राम के कार्यों को करने के लिए उत्सुक रहते हैं।
॥ चौपाई 8 ॥
प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया। राम लखन सीता मन बसिया॥
अर्थ: आप राम कथा सुनने के प्रेमी हैं। श्री राम, लक्ष्मण और सीता आपके हृदय में बसते हैं।
॥ चौपाई 9 ॥
सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा। बिकट रूप धरि लंक जरावा॥
अर्थ: आपने माता सीता को छोटा रूप दिखाया और भयानक रूप धारण करके लंका जलाई।
॥ चौपाई 10 ॥
भीम रूप धरि असुर सँहारे। रामचंद्र के काज सँवारे॥
अर्थ: आपने विशाल रूप धारण करके राक्षसों का संहार किया और श्री राम के कार्य सफल किए।
॥ चौपाई 11 ॥
लाय संजीवन लखन जियाये। श्रीरघुबीर हरषि उर लाये॥
अर्थ: आप संजीवनी बूटी लाए जिससे लक्ष्मण जी के प्राण बचे। प्रसन्न होकर श्री राम ने आपको गले लगाया।
॥ चौपाई 12 ॥
रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई। तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई॥
अर्थ: श्री राम ने आपकी प्रशंसा करते हुए कहा कि तुम मेरे भाई भरत के समान ही मुझे प्रिय हो।
॥ चौपाई 13 ॥
सहस बदन तुम्हरो जस गावैं। अस कहि श्रीपति कंठ लगावैं॥
अर्थ: हजारों मुखों से तुम्हारा यश गाया जाए - ऐसा कहकर श्री राम ने आपको गले लगाया।
॥ चौपाई 14 ॥
सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा। नारद सारद सहित अहीसा॥
अर्थ: सनक, ब्रह्मा, मुनि, नारद, सरस्वती और शेषनाग सभी आपका यश गाते हैं।
अर्थ: हे संकट हरने वाले, मंगल मूर्ति पवनपुत्र! आप श्री राम, लक्ष्मण और सीता सहित मेरे हृदय में निवास करें।
हनुमान चालीसा पाठ के लाभ (Benefits of Reciting Hanuman Chalisa)
💪
शक्ति एवं साहस
नियमित पाठ से मानसिक शक्ति और साहस बढ़ता है।
🛡️
संकट से रक्षा
विपत्ति के समय हनुमान जी की कृपा से रक्षा होती है।
😌
मन की शांति
चिंता, भय और तनाव दूर होकर मन में शांति आती है।
🌟
नकारात्मकता नाश
बुरी शक्तियों और नकारात्मक ऊर्जा से मुक्ति मिलती है।
📚
बुद्धि और विद्या
बुद्धि, ज्ञान और एकाग्रता में वृद्धि होती है।
🙏
मोक्ष की ओर
आध्यात्मिक उन्नति और मोक्ष-मार्ग की प्राप्ति में सहायक।
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हनुमान चालीसा कब और कैसे पढ़ें? (When & How to Recite Hanuman Chalisa)
हनुमान चालीसा का पाठ किसी भी समय किया जा सकता है, परंतु कुछ विशेष समय और दिन अत्यंत फलदायी माने जाते हैं:
📅 शुभ दिन — Auspicious Days
मंगलवारशनिवारहनुमान जयंतीसुंदरकांड दिवसप्रातःकाल
🕯️ पाठ की विधि — Method of Recitation
स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें
हनुमान जी की मूर्ति या तस्वीर के सामने बैठें
दीपक और धूपबत्ती जलाएं
मन को एकाग्र करके शुद्ध उच्चारण से पढ़ें
पाठ के बाद प्रसाद चढ़ाएं (केला, लड्डू)
अंत में आरती करें
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (Frequently Asked Questions (FAQ))
हनुमान चालीसा कितनी बार पढ़नी चाहिए? +
सामान्यतः प्रतिदिन एक बार पाठ करना पर्याप्त माना जाता है। विशेष मनोकामना के लिए 11 बार, 21 बार या 108 बार पाठ का विधान है। मंगलवार और शनिवार को पाठ का विशेष महत्त्व है।
क्या महिलाएं हनुमान चालीसा पढ़ सकती हैं? +
हाँ, महिलाएं पूर्ण श्रद्धा के साथ हनुमान चालीसा का पाठ कर सकती हैं। यह एक सार्वभौमिक भक्ति रचना है जो सभी के लिए समान रूप से लाभकारी है।
Hanuman Chalisa PDF कहाँ से डाउनलोड करें? +
इस पेज पर ऊपर दिए गए "PDF Download" बटन से आप हनुमान चालीसा का सम्पूर्ण PDF मुफ्त में डाउनलोड कर सकते हैं। यह PDF अर्थ सहित और प्रिंट-रेडी फॉर्मेट में है।
हनुमान चालीसा किसने लिखी? +
हनुमान चालीसा की रचना 16वीं शताब्दी में महाकवि गोस्वामी तुलसीदास जी ने अवधी भाषा में की थी। वे रामचरितमानस के रचयिता भी हैं।
हनुमान चालीसा पढ़ने का सबसे अच्छा समय कौन सा है? +
ब्रह्म मुहूर्त (सूर्योदय से पहले) या सूर्यास्त के बाद संध्या काल को हनुमान चालीसा पढ़ना सबसे शुभ माना जाता है। मंगलवार और शनिवार के दिन विशेष फल की प्राप्ति होती है।