Vaishnava Songs
नंदग्राम धाम
नंदग्राम धाम वैष्णव भजन · nandgramdham.org/songs/hi

आबेशे अबश अङ्ग धीरे धीरे चले

आबेशे अबश अङ्ग धीरे धीरे चले भाब-भरे गर गर आङ्खि नाहि मेले
अर्थ

प्रेम के आवेश में उनके अंग बेबस थे, और वे धीरे-धीरे चलते थे। भाव में डूबे होने से उनकी आँखें खुल नहीं पाती थीं।

पूरत चरित यत बिपरीति-काहिनी शुनि पहुं मूरछित लोटाय धरणी
अर्थ

प्राचीन काल में की गई अपनी लीलाओं की अद्भुत कथाएं सुनकर भगवान भूमि पर लोटने लगे और मूर्छित हो गए।

पतित हेरिया कान्दे नाहि बान्धे थिर कत शत धारा बहे नयनेर नीर
अर्थ

पतित बद्ध जीवों को देखकर वे रो पड़े। वे शांत नहीं रह पाते थे। उनके नेत्रों से कितनी सैकड़ों अश्रु-नदियां प्रवाहित होती थीं?

नाचे पहुं रसिक सुजान यार गुणे दरबये दारु पाषाण
अर्थ

प्रेमोन्माद के अमृत का आस्वादन करते हुए वे नाचे। उनकी महिमा से पत्थर और काठ भी द्रवित हो उठे।

पुलके मण्डित श्री-भुज-युग तुलि लोलिया लोलिया पडे हरि हरि बलि
अर्थ

उन्होंने अपनी सुन्दर भुजाएँ उठाईं, जिन पर रोमांच से रोम-रोम खड़े थे। वे 'हरि! हरि!' पुकारते रहे, और भूमि पर गिरकर लोटने लगे।

कुलबती झुरे मने झुरे दुटि आङ्खि झुरिया झुरिया कान्दे बनेर पशु पाखी
अर्थ

साध्वी स्त्रियां हृदय में रो उठीं। उनके नेत्रों से अश्रु बहने लगे। वन के पशु-पक्षी भी रोते-रोते बिलख उठे।

यार भाबे गृह-बासी छाडे गृह-सुख बलराम दास सबे ए रसे बिमुख
अर्थ

उनके प्रेम-भाव से गृहस्थ लोग भी घर का सुख छोड़ देते हैं। केवल बलराम दास ही इस रस से विमुख रह गया है।

इस भजन के बारे में

पद
7