अद्वैत आचार्य गुण के कहिते पारे
अद्वैत आचार्य की महिमा का वर्णन कौन कर सकता है, जो भगवान गौरचन्द्र को इस जगत में ले आए?
वे बार-बार तुलसी अर्पित करते रहे। बार-बार वे गरज कर पुकारते रहे। इस प्रकार अद्वैत आचार्य भगवान गौर को नवद्वीप में ले आए। इस प्रकार उन्होंने सबको जन्म-मृत्यु के संसार से तार दिया।
भगवान चैतन्य और भगवान नित्यानन्द अद्वैत आचार्य के घर पर मिले। प्रेम के अपार सागर में डूबकर वे तीनों नाचने लगे।
प्रेम से अभिभूत होकर वे 'हरिबोल! हरिबोल!' पुकारने लगे। प्रेम से अभिभूत होकर वे भूमि पर गिर पड़े।
वे घर-घर जाकर भक्तों के साथ आनन्द के महोत्सव मनाते रहे। जब अद्वैत आचार्य द्वार-द्वार जाते, तब संकर्षण दास उनके पीछे-पीछे चलते।