आमार निताइ मिले ना
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3 रिकॉर्डिंगहे भूले हुए मन! तुझे न मेरे नित्यानन्द प्रभु मिलते हैं, न गौरांग मिलते हैं। तूने अपने सारे शरीर पर तिलक लगा लिया, फिर भी तुझे गौरचाँद नहीं मिलते।
यदि तू भीतर और बाहर से ठीक नहीं है, तो तुझे गौर प्रभु का सच्चा प्रेम कहीं कैसे मिलेगा। हे मित्र! यदि तेरी उपासना ठीक नहीं है, तो तुझे शुद्ध प्रेम का वह सुवर्ण-खजाना नहीं मिलेगा।
पहले अपने मलिन मन को शुद्ध कर, तभी प्रभु के नाम और गुणगान के प्रति अनुराग उत्पन्न होगा। अनुराग से मैंने तिलक तो लगाया, किन्तु गौर-भजन न हो सका। हे भूले हुए मन!
मेरे दयालु नित्यानन्द उसी के घर में निवास करते हैं, जो इस नित्य प्रेम-धन से प्रीति रखता है। जब तू परम भक्ति से प्रभु के उस प्रियतम को पुकारेगा, तो तेरा मार्ग सफल होगा, असफल नहीं।
ऑडियो के लिए आभार: इस्कॉन डिज़ायर ट्री। सभी भक्त गायकों की जय।