अपरूप गोरा नट राज
अद्भुत गौर प्रभु नर्तकों के राजा हैं। प्रेम के नायक वे नवद्वीप में लीलाएँ करते हैं।
उनके बाल कुंचित हैं। वे दिव्य सुगंध से युक्त हैं। चंदन का तिलक उनके ललाट को सुशोभित करता है। उन्हें देखकर सती स्त्रियाँ लज्जा के महल का द्वार बंद कर देती हैं।
उनकी सुन्दर भुजाएँ श्रेष्ठ हाथी की सूँड को भी हरा देती हैं। उनके वक्ष पर गज-मोतियों का दोहरा हार है, मानो सुमेरु पर्वत के शिखर पर से स्वर्ग-गंगा की धारा उमड़कर बह रही हो।
उनके लाल चरणों की कोई बराबरी नहीं है। उनके नख रत्नों या चमकते चन्द्रमाओं के समान हैं। उनकी मधुर सुगन्ध भक्तरूपी गुनगुनाते भौंरों को खींच लेती है। वासुदेव दत्त उन पर मोहित हैं।