अपरूप हेम मणि भास
वे अद्भुत पुखराज के समान चमकते हैं। वे सम्पूर्ण लोकों को आलोकित करते हैं।
चारों दिशाओं में उनके निजी पार्षदों के चमकते तारे शोभायमान हैं। वे कलियुग के अन्धकार को दूर फेंक देते हैं।
नित्य किशोर, ब्राह्मणों के राजा, भगवान् गौर नवद्वीप में प्रकट हुए हैं।
चर और अचर सभी प्राणी आनन्द से रोमांचित हो उठे हैं। शुद्ध प्रेम के मधुर सुधा-रस का पान करके वे उन्मत्त हो गए हैं।
कोई चन्द्रकान्त मणि के समान रोता है, कोई खिलती हुई कुमुदिनी के समान हँसता है।
गोविन्द दास चकोर पक्षी के समान हो गए हैं। इन लीलाओं की तेजोमय महिमा की एक किरण का स्वाद पाकर वे विभोर हो जाते हैं।