Vaishnava Songs
नंदग्राम धाम
नंदग्राम धाम वैष्णव भजन · nandgramdham.org/songs/hi

अपरूप हेम मणि भास

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टेक्स्ट
अपरूप हेम-मणि भास अखिल भुबन परकाश
अर्थ

वे अद्भुत पुखराज के समान चमकते हैं। वे सम्पूर्ण लोकों को आलोकित करते हैं।

चौदिके पारिषद-तारा दूर करु कलि-आन्धियार
अर्थ

चारों दिशाओं में उनके निजी पार्षदों के चमकते तारे शोभायमान हैं। वे कलियुग के अन्धकार को दूर फेंक देते हैं।

3 टेक
अभिनब गोरा द्विज-राज उयल नबद्वीप माझ
अर्थ

नित्य किशोर, ब्राह्मणों के राजा, भगवान् गौर नवद्वीप में प्रकट हुए हैं।

पुलकित स्थिर-चर-जाति प्रेम-अमिया-रसे माति
अर्थ

चर और अचर सभी प्राणी आनन्द से रोमांचित हो उठे हैं। शुद्ध प्रेम के मधुर सुधा-रस का पान करके वे उन्मत्त हो गए हैं।

केह बिधु-म.नि सम कान्दे केह हासे कुमुदिनी छान्दे
अर्थ

कोई चन्द्रकान्त मणि के समान रोता है, कोई खिलती हुई कुमुदिनी के समान हँसता है।

गोबिन्द दास चकोर रुचि-लब लागि बिभोर
अर्थ

गोविन्द दास चकोर पक्षी के समान हो गए हैं। इन लीलाओं की तेजोमय महिमा की एक किरण का स्वाद पाकर वे विभोर हो जाते हैं।