Vaishnava Songs
नंदग्राम धाम
नंदग्राम धाम वैष्णव भजन · nandgramdham.org/songs/hi
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टेक्स्ट
अरुण नयन बिबिध भूषण शिरेते पाग लट-पटिया चौदिके फिरि फिरि बाहु-युग तुलि नाचत हरि हरि बलिया
अर्थ

अरुण नेत्र, विविध आभूषण, सिर पर सुशोभित पगड़ी लिए, हरि हरि पुकारते हुए, दोनों बाहें ऊंची उठाकर चारों दिशाओं में घूम-घूमकर वे नृत्य करते हैं।

2 टेक
निता-इ रङ्गिया नाचे अरुण नयने ओ चान्द-बयाने कत ना माधुरी आछे
अर्थ

गौरवशाली निताई उमंग में नाचते हैं। उनके नेत्र लाल हैं। उनका मुख चन्द्रमा जैसा है। उनमें कितनी माधुरी भरी है?

चलन सुन्दर मत्त करि-बर नूपुर झङ्कृत बलिया भाबे अबश नाहि दिग-पाश गौर बलि हुहुङ्कारिया
अर्थ

मत्त गजराज के समान वे सुन्दर चाल से चलते हैं, उनकी पायल छन-छन बजती है। भाव-विभोर होकर उन्हें दिशाओं का भान नहीं रहता, वे 'गौर, गौर' पुकारकर गरज उठते हैं।

यतेक भकत धरणी लोटत हेरिया ओ चान्द-बयानिया बासुदेब घोष कातर बञ्चित मागहुं प्रेम-रस दानिया
अर्थ

उनके चन्द्र-मुख को देखकर भक्तजन भाव-विभोर होकर धरती पर लोटने लगते हैं। सब कोई प्रेम-रस में डूब जाते हैं, केवल दुखी वासुदेव घोष उस रस में नहीं डूब पाते। केवल वे ही वंचित रह जाते हैं।