आयत नित्यानन्द अदभुत चान्द
श्री नित्यानन्द प्रभु एक अद्भुत तेजस्वी चंद्रमा के समान हैं। उनका चलना और नाचना अत्यंत सुंदर है। वे तीनों लोकों के सभी जीवों को मोहित कर लेते हैं।
उनके नेत्र और मुख तेजस्वी और सुंदर हैं। उनकी दोनों भुजाएँ कमल के फूलों और काले भौंरों के समान चमकती हैं। उनके लाल होंठ उगते सूरज की तरह चमकते हैं। उनके दाँत मोतियों की पंक्ति के समान हैं।
जन्म-मृत्यु के इस संसार में दुखी जीवों पर वे अपने करुणामय वचनों का अमृत छिड़कते हैं। हरे कृष्ण महामंत्र के तेजस्वी प्रकाश से वे पापमय वासनाओं के अंधकार को नष्ट कर देते हैं।
चारों ओर अपने संगियों से घिरे हुए वे उस चंद्रमा के समान हैं जो अनेक तारों से घिरा हुआ रात्रि को आलोकित करता है। वे जाह्नवा के सुंदर प्रियतम हैं। उनके सुंदर चरण-कमलों को पाने की आकांक्षा से कानू दास ये वचन कहते हैं।