Vaishnava Songs
नंदग्राम धाम
नंदग्राम धाम वैष्णव भजन · nandgramdham.org/songs/hi

बन्दे प्रभु नित्यानन्द केबल आनन्द कन्द

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बन्दे प्रभु नित्यानन्द केबल आनन्द-कन्द झलमल आभरण साजे दु-इ दिके श्रुति-मूले मकर कुण्डल दोले गले एक कौस्तुभ बिराजे
अर्थ

मैं भगवान नित्यानन्द को प्रणाम करता हूँ। वे दिव्य आनंद के मूल हैं। वे चमकते आभूषणों से सुसज्जित हैं। उनके कानों में मकर आकार के कुंडल हिलते हैं। उनके गले में कौस्तुभ मणि दमकती है।

सु-बलित भुज-दण्ड जिनि करि-बर शुण्ड ताहाते शोभये हेम-दण्ड अरुण अम्बर गाय सिंहेर गमने धाय देखि कम्पे असुर पाषण्ड
अर्थ

उनकी सुन्दर भुजाएँ श्रेष्ठ हाथी की सूँड़ को भी हरा देती हैं। वे सोने की एक शोभामय गदा थामे हैं। उनके अंगों पर केसरिया वस्त्र सजे हैं। वे सिंह की चाल से दौड़ते हैं। उन्हें देखकर असुर और पाषण्डी काँपने लगते हैं।

अङ्ग देखि शुद्ध-बर्ण दुटी आङ्खि पद्म पर्ण ताहाते झरये मकरन्द हेम-गिरि बहे येन सुरधुनी बहे हेन देखि सुरलोकेर आनन्द
अर्थ

उनका रंग शुद्ध और उज्ज्वल है। उनके दोनों नेत्र कमल की पंखुड़ियाँ हैं, जिनसे आँसुओं का मधु झरता है। वे मानो सोने का पर्वत हैं, जिससे एक बड़ी गंगा बह रही हो। उन्हें देखकर देवता आनन्द से भर जाते हैं।

सर्बाङ्गे पुलक-छटा येन कदम्बेर घटा लम्फे कम्फे हय बसुमती बीर-दाप मालसाटे शबदे ब्रह्माण्ड फाटे देखि ब्रह्मलोके करे स्तुति
अर्थ

उनके शरीर के रोम कदम्ब के केसर की तरह खड़े हो जाते हैं। जब वे उछलते हैं तो धरती काँप उठती है। जब वे वीरता से अपनी छाती पर थाप देते हैं, तो उस ध्वनि से सारे लोक फट जाते हैं। उन्हें देखकर ब्रह्मलोक के निवासी उनकी स्तुति करते हैं।

चैतन्येर प्रेम-रत्न जीबेरे करिया यत्न दिल पहुं परम आनन्दे कहे बृन्दाबन दासे आपनार कर्म-दोषे ना भजिलाम निता-इ-पद-द्वन्द्वे
अर्थ

पतित जीवों को वे सावधानी से चैतन्य-प्रेम का रत्न प्रदान करते हैं। इस प्रकार वे प्रभु को अत्यंत प्रसन्न करते हैं। वृन्दावन दास कहते हैं, अपने ही पूर्वकर्मों के दोष से मैं अब तक निताई के चरण-युगल की भक्ति नहीं कर पाया।