Vaishnava Songs
नंदग्राम धाम
नंदग्राम धाम वैष्णव भजन · nandgramdham.org/songs/hi
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टेक्स्ट
भाब-भरे गर गर चित क्षणे उठे क्षणे बैसे ना पाय सम्बित
अर्थ

उनका हृदय प्रेम से अभिभूत हो जाता है। एक क्षण वे खड़े होते हैं, दूसरे क्षण बैठ जाते हैं। फिर उन्हें कुछ भी सुध नहीं रहती।

अति रसे नाहि बान्धे थेह सोँअरि सोँअरि कान्दे पूरब सेनेह
अर्थ

वे प्रेम के अमृत से विभोर हैं। उन्हें चैन नहीं मिलता। पहले जिनसे उन्होंने प्रेम किया था, उन्हें बार-बार याद करके वे रो पड़ते हैं।

नाचे पहुं गोरा नट-राज इ लागि गोकुल-पति सङ्कीर्तन माझ
अर्थ

गौर प्रभु नृत्य करते हैं। वे नर्तकों के राजा हैं। गोकुल के राजा इस संकीर्तन के उत्सव में क्यों उतर आए?

प्रिय-गदाधर-करे धरि मरम-कथाटि कहे फुकरि फुकरि
अर्थ

प्रिय गदाधर का हाथ पकड़कर, बार-बार रोते हुए, वे अपने हृदय की बात कहते हैं।

उग मग आनन्द-हिलोले लुलिया लुलिया पडे पण्डितेर कोले
अर्थ

आनंद की लहरों में वे उठते और डूबते हैं। बेचैन होकर इधर-उधर डोलते हुए, अंत में वे गदाधर पंडित की गोद में गिर पड़ते हैं।

गोरा-रसे सब रसमय ना दरबे बलराम-पाषाण-हृदय
अर्थ

गौर प्रभु का अमृत सभी अमृतों में सबसे मधुर है। फिर भी बलराम दास का पथरीला हृदय प्रेम से पिघलता नहीं है।