Vaishnava Songs
नंदग्राम धाम
नंदग्राम धाम वैष्णव भजन · nandgramdham.org/songs/hi

भाबेर आबेशे रहु सीता पति मोर पहुं

भाबेर आबेशे रहु सीता-पति मोर पहुं योगासने बसिया आछिल हठात् कि भाब मने हुहुङ्कार गरजने अकस्मात् उठि दाण्डा-इला
अर्थ

प्रेम के भाव से भरकर मेरे प्रभु अद्वैत योगासन में बैठे थे। हृदय में भाव के उमड़ने से वे अचानक गरज उठे। वे तुरन्त उठ खड़े हुए।

टेक
आनियाछि आनियाछि अबनी-मण्डली जगत तारिबे ये-इ नदीया उदय से-इ इहा बलि नाचे बाहु तुलि
अर्थ

"मैं उन्हें लाया! मैं उन्हें इस पृथ्वी-मण्डल में लाया! वे समस्त लोकों का उद्धार करेंगे! वे नदिया में अवतरित हुए हैं!" ऐसा कहते हुए अद्वैत प्रभु भुजाएँ उठाकर नृत्य करते हैं।

तांहार उद्दण्ड नृत्य भू-कम्पन ह-इल मर्त्ते धरणी धरिते नारे भार शान्तिपुर-नाथ सङ्गे नर-नारी नाचे रङ्गे येन भेल आनन्द-बाजार
अर्थ

उनके उन्मत्त नृत्य से धरती काँप उठती है। धरती उनके कदमों का भार सह नहीं पाती। अद्वैत प्रभु के चारों ओर स्त्री-पुरुष भी आनन्द से नाचते हैं। वह स्थान आनन्द का बाज़ार बन गया है।

अद्वैतेर हुहुङ्कारे सप्त स्वर्ग भेद कैरे परब्योमे लागिल झङ्कार महाप्रभु-आगमन जानिलेक त्रि-भुबन बलरामेर आनन्द-अपार
अर्थ

अद्वैत प्रभु की गर्जना से सातों स्वर्गलोक फट गए। उनकी गर्जना की गूँज परव्योम (आध्यात्मिक आकाश) तक पहुँच गई। अब तीनों लोक जान गए कि महाप्रभु आ गए हैं। अब बलराम दास आनन्द के अपार सागर में तैर रहे हैं।

इस भजन के बारे में

पद
4