Vaishnava Songs
नंदग्राम धाम
नंदग्राम धाम वैष्णव भजन · nandgramdham.org/songs/hi
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टेक्स्ट
भुबन-आनन्द-कन्द बलराम नित्यानन्द अबतीर्ण हैल कलि-काले घुचिल सकल दुख देखिया ओ चान्द-मुख भासे लोक आनन्द-हिल्लोले
अर्थ

जगत के आनन्द के मूल भगवान् बलराम-नित्यानन्द कलियुग में इस पृथ्वी पर अवतरित हुए और सब दुःखों का नाश किया। उनका चन्द्रमुख निहारकर इस संसार के लोग आनन्द की तरंगों में तैरते हैं।

2 टेक
जय जय नित्यानन्द राम कनक-चम्पक पाति अङ्गुले चान्देर पान्ति रूपे जितल कोटि काम
अर्थ

जय जय भगवान नित्यानन्द-राम की! उनका वर्ण अनेक सुवर्ण चंपा के फूलों को भी लजा देता है। उनके हाथों-पैरों के नाखून अनेक चंद्रमाओं को भी लजा देते हैं। उनका सुंदर रूप करोड़ों कामदेवों को भी लजा देता है।

ओ मुख-मण्डल देखि पूर्ण-चन्द्र किसे लेखि दीघल नयान भाँअ धनु आजानु-लभित-भुज- तल थल-पङ्कज कोटि क्षीण करि अरि जनु
अर्थ

मैं कैसे लिखूँ कि भगवान नित्यानन्द का मुखमंडल मात्र पूर्ण चंद्रमा के समान है, कि उनके दीर्घ नेत्र और भौंहें मात्र धनुर्धारी के धनुष के समान हैं, या कि घुटनों तक पहुँचती उनकी भुजाएँ मात्र स्थल-कमलों के समान हैं? भगवान नित्यानन्द की तुलना में करोड़ों चंद्रमा, धनुष और कमल भी फीके और तुच्छ पड़ जाते हैं।

चरण-कमल-तले भकत भ्रमर बुले आध बाणी अमिञा प्रकाश इत्थं कलि-युगे जीबे उद्धार ह-इल सबे कहे दीन दुःखी कृष्ण-दास
अर्थ

भक्तजन भगवान नित्यानन्द के चरण-कमल के भँवरे बन गए हैं। भगवान नित्यानन्द के अधूरे वचन दिव्य अमृत के समान हैं। भगवान नित्यानन्द कलियुग में सभी पतित जीवों का उद्धार करते हैं। ऐसा दीन-दुखी कृष्णदास कहते हैं।