भुबन आनन्द कन्द बलराम नित्यानन्द
जगत के आनन्द के मूल भगवान् बलराम-नित्यानन्द कलियुग में इस पृथ्वी पर अवतरित हुए और सब दुःखों का नाश किया। उनका चन्द्रमुख निहारकर इस संसार के लोग आनन्द की तरंगों में तैरते हैं।
जय जय भगवान नित्यानन्द-राम की! उनका वर्ण अनेक सुवर्ण चंपा के फूलों को भी लजा देता है। उनके हाथों-पैरों के नाखून अनेक चंद्रमाओं को भी लजा देते हैं। उनका सुंदर रूप करोड़ों कामदेवों को भी लजा देता है।
मैं कैसे लिखूँ कि भगवान नित्यानन्द का मुखमंडल मात्र पूर्ण चंद्रमा के समान है, कि उनके दीर्घ नेत्र और भौंहें मात्र धनुर्धारी के धनुष के समान हैं, या कि घुटनों तक पहुँचती उनकी भुजाएँ मात्र स्थल-कमलों के समान हैं? भगवान नित्यानन्द की तुलना में करोड़ों चंद्रमा, धनुष और कमल भी फीके और तुच्छ पड़ जाते हैं।
भक्तजन भगवान नित्यानन्द के चरण-कमल के भँवरे बन गए हैं। भगवान नित्यानन्द के अधूरे वचन दिव्य अमृत के समान हैं। भगवान नित्यानन्द कलियुग में सभी पतित जीवों का उद्धार करते हैं। ऐसा दीन-दुखी कृष्णदास कहते हैं।