Vaishnava Songs
नंदग्राम धाम
नंदग्राम धाम वैष्णव भजन · nandgramdham.org/songs/hi

चले निताइ प्रेम भरे दिग ठलमल करे

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टेक्स्ट
चले निताइ प्रेम-भरे दिग ठलमल करे पद-भरे अबनि दोलय आध आध कथा कय मुखेर बाहिर नय निज पारिषदे गुण गाय
अर्थ

प्रेमोन्माद में डूबे प्रभु निताई चलते हैं। उनके चरणों के भार से पृथ्वी डोलने लगती है। दिशाएं कंपित हो जाती हैं। उनके मुख से अधूरे शब्द निकलते हैं। उनके पार्षद उनकी महिमा का गान करते हैं।

2 टेक
देख भा-इ अबनी-मण्डले नित्यानन्द भाइयार मुख हेरि बाढये आनन्द
अर्थ

हे भाई, देखो भगवान नित्यानन्द को, जो इस पृथ्वी-मंडल में विचरण कर रहे हैं। अपने भाइयों के मुख देखकर वे आनंद से भर जाते हैं।

परिधान नील धठी आण्ठनि ना रहे कटि अन्तर्भाबे बाह्य नाहि जाने अ\ङ्ग हेलि दुलि चले गौर गौइर सदा बले निशी निशी आब नाहि जाने
अर्थ

वे नीले वस्त्र पहनते हैं। उनकी कटि पर अब कमरबंद नहीं बंधा रहता। प्रेमोन्माद में डूबे वे बाहरी संसार का कुछ भी नहीं जानते। उनका शरीर धूल में लोट जाता है। वे बार-बार 'गौर! गौर!' पुकारते हैं। उन्हें यह भी ज्ञान नहीं रहता कि दिन है या रात।

युगे युगे राम सुजन-प्रतिपालक पाषण्डीर करिते बिनाश श्री-कृष्ण-चैतन्यचन्द्र ठाकुर श्री-नित्यानन्द गुण गाय बृन्दाबन दास
अर्थ

युग-युग में वे बलराम हैं। वे साधु भक्तों की रक्षा करते हैं और पाषण्डियों का विनाश करते हैं। इस प्रकार वृन्दावन दास श्री कृष्ण चैतन्यचन्द्र और ठाकुर श्री नित्यानन्द की महिमा गाते हैं।