देखरे भा इ प्रबल मल्ल रूप धारी
हे मेरे भाई, देखो! उनका रूप एक बलशाली मल्ल का रूप है। उनका नाम निताई है। वे अपने भाई-भक्तों को पुकारते हैं। मुझमें उनकी लीलाओं को समझने की शक्ति नहीं है।
वे प्रेमोन्माद से अभिभूत हैं। उनके घूमते नेत्रों से अश्रु बहते हैं। उन्हें दिशाओं का भी भान नहीं रहता। वे सिंह के समान गरजते हैं। वे मेघ के समान गड़गड़ाते हैं। वे इतने तन्मय हैं कि उन्हें सम्पूर्ण जगत में किसी का भी भान नहीं रहता।
उनकी लीलाएँ अमृत हैं। उनका रूप सुन्दर है। वे आनन्द से नाचने की लीलाओं का आनन्द लेते हैं। वे कलियुग की मूर्खता को चूर-चूर कर देते हैं। वे चलते हुए इधर-उधर झूमते हैं। वे संकीर्तन की लीलाओं में मग्न रहते हैं।
उनकी कटि पर अनेक रंगों के वस्त्र सुशोभित हैं। उनके अंगों पर चन्दन का लेप है। ज्ञान दास कहते हैं, विधि ने उन्हें कलियुग में ला दिया, इसीलिए अब कलियुग में इस प्रकार का आनन्द उपस्थित है।