नंदग्राम धाम
वैष्णव भजन · nandgramdham.org/songs/hi
गौर गदाधर दुहुँ तनु
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गाते समय
गौर गदाधर दुहुँ तनु
अपरूप प्रेम-बिथार
दुहुँ दुहुँ हरषे परशे यब बिलसये
अमिया बरखे अनिबार
टेक
देख देख अपरूप दुहुँ जन लेह
को आछु भाब प्रेममय चतुराली
मजिया पा-ओब सेह
करे करे नयने यो-इ माधुरी
सो सब कि बुझब हाम
अपरूप रूप हेरि तनु चमका-इत
अखिल भुबने अनुपाम
अमिया पुतली किये रसमय मूरति
किये दुहुँ प्रेम आकार
हेरा-इते जग-जन तनु मन भुलाय
यदु किये पा-ओब पार
इस भजन के बारे में
- रचयिता
- यदुनाथ दास
- राग
- केदार राग
- पद
- 4