नंदग्राम धाम
वैष्णव भजन · nandgramdham.org/songs/hi
गोरा प्रेमे गर गर निता इ आमार
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गाते समय
गोरा-प्रेमे गर गर निता-इ आमार
अरुण-नयने बहे सुरधुनी-धार
अर्थ
मेरे निताई प्रभु चैतन्य महाप्रभु के प्रेम से अभिभूत हैं। निताई प्रभु के अरुण नेत्रों से अश्रुओं की दिव्य गंगा बहती है।
बिपुल-पुलकाबली शोहे पहुं गाय
गजेन्द्र-गमने हेलि दुलि चलि याय
अर्थ
उनके शरीर के रोम खड़े हो जाते हैं। झूमते-झूमते वे गजराज के समान चलते हैं।
पतितेरे निरखिया दु-बाहु पसारि
कोले करि सघने बोलय हरि हरि
अर्थ
किसी गिरे हुए पापी को देखकर वे अपनी दोनों भुजाएँ फैलाते हैं, उस पापी को गले लगाते हैं, और विनती करते हैं, "हरि! हरि! बोलो!"
एमन दयार निधि के ह-इबे आर
नरहरि अधम तरिते अबतार
अर्थ
निताई प्रभु दया के सागर हैं, उनके जैसा और कौन हो सकता है? आखिर वे इस पतित पापी नरहरि का उद्धार करने के लिए ही इस संसार में अवतरित हुए हैं।
इस भजन के बारे में
- पद
- 4