Vaishnava Songs
नंदग्राम धाम
नंदग्राम धाम वैष्णव भजन · nandgramdham.org/songs/hi

हेम बरण बर सुन्दर बिग्रह

टेक
हेम-बरण बर सुन्दर बिग्रह सुर-तरु बर परकाश पुलक पत्र-नब प्रेम पक्व-फल कुसुम मन्द मृदु-हास
अर्थ

उनका सुन्दर स्वर्णिम रूप एक दिव्य वृक्ष है। उस वृक्ष में उनके खड़े हुए रोम पत्ते हैं, उनका दिव्य प्रेम पके हुए फल है और उनकी मृदु मुस्कान फूल हैं।

नाचत गौर मनोहर सुन्दर अद्भुत रण्जित सुरधुनी धार त्रि-जगत लोक ओक भरि पा-ओल भकति-रतन-मणि-हार
अर्थ

मनोहर, अद्भुत और शोभामय भगवान गौर गंगा की धारा के किनारे नृत्य करते हैं। तीनों लोकों के निवासियों को वे भक्ति-रत्नों का हार देते हैं।

भाब बिभबमय रस-रूप अनुभब सु-बलित रसमय अङ्ग द्विरद मत्त-गति अति सु-मनोहर मूरछित लाख अनङ्ग
अर्थ

उनका शरीर दिव्य प्रेम के अमृत से भरा है। उनका रसमय रूप प्रेम के सब लक्षण प्रकट करता है। उनकी मनोहर चाल मतवाले हाथी की चाल के समान है। वे हृदय को मोह लेते हैं। वे लाखों कामदेवों को मूर्छित कर देते हैं।

धनि क्षिति-मण्डल धनि नदीया पुर धनि धनि ह-इ कलि-काल धनि अबतार धनिरे धनि कीर्तन जोआन दास नह पार
अर्थ

धन्य है यह पृथ्वी-मण्डल! धन्य है नदिया नगर! धन्य, धन्य है कलियुग! धन्य है भगवान गौर का इस संसार में अवतार! सब धन्यताओं में भी परम धन्य है उनका संकीर्तन आन्दोलन, पवित्र नामों का कीर्तन! ज्ञान दास संकीर्तन से बढ़कर किसी और को महिमामय नहीं जानते।

इस भजन के बारे में

रचयिता
ज्ञान दास
पद
4