जार् मुखे भाइ, हरि कथा नाइ
हे भाई! जिसके मुख में हरि-कथा नहीं है, उसके पास मत जाओ। जिसका मुख देखकर तुम हरि को भूल जाओगे, उसके मुख की ओर मत देखो।
इस मोह-सागर में तुम और कितने दिन रहना चाहते हो? उस एकमात्र सहारे का हाथ पकड़ लो जो तुम्हें थाम सकता है। दूसरों के साथ भटककर व्यर्थ ही माया की चोट क्यों सहते हो?
कोई कब तुमसे क्या कह दे, तुम कब तक हर किसी की बात सुनते रहोगे और उनकी बकबक से उठे विचारों के अनुसार चलते रहोगे? इसके बदले, उनके चरणों का चिन्तन क्यों नहीं करते, जो सुख और दुःख दोनों में तुम्हारी रक्षा करेंगे?
केवल हरि-कथा कहो, हरि के गुण गाओ! हरिनाम के रस में सदा मत्त रहो। नित्य उनके नाम और गुण गाओ, इसके अतिरिक्त और कुछ मत गाओ।
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ऑडियो के लिए आभार: इस्कॉन डिज़ायर ट्री। सभी भक्त गायकों की जय।