जय जय गोपीनाथ मदन मोहन
जय जय हो, हे गोपियों के स्वामी, हे कामदेव से भी अधिक सुंदर प्रभु! जय हो, हे दिव्य लीला का अमृत चखने वाले युगल-किशोर!
जय हो, हे राधा के प्रिय, हे अधरों पर मुरली धारण करने वाले! जय हो, हे व्रज में लीला करने वाले! जय हो, हे प्रेम के अमृत-चन्द्र!
जय हो, हे लक्ष्मीपति, हे गिरिधारी, हे गोपियों के वस्त्र चुराने वाले, हे त्रिभंग मुद्रा में खड़े, वन-फूलों से सजे सुंदर रसिक नायक!
जय हो, हे प्रेम-लीला के सागर, हे व्रज में विहार करने वाले, हे अमृत-स्वरूप, हे गोकुल-निवासी!
जय हो, हे व्रजपति, हे चंचल बालक, हे प्रेम-लीला के नायक, हे परम प्रवीण और विद्वान प्रभु, हे प्रेम और आनंद के दाता!
हे श्याम प्रभु, आपके बाईं ओर वह प्यारी, शोभामयी किशोरी कौन है? हे प्रभु, आपको देखकर गोपाल दास का मन कैसा मोहित हो गया है!