Vaishnava Songs
नंदग्राम धाम
नंदग्राम धाम वैष्णव भजन · nandgramdham.org/songs/hi
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टेक्स्ट
जय जय गुरु गोसाञी-श्री-चरण सार याहा हैते हब पार ए भब-संसार
अर्थ

गुरु और भगवान के श्री चरणों की जय हो, जय हो! इन्हीं चरणों के सहारे हम जन्म-मृत्यु के इस भव-सागर के पार जा सकते हैं।

मनेर आनन्दे बल हरि भज बृन्दाबन श्री-गुरु बैष्णब पाय माज-इया मन
अर्थ

आनंदित मन से 'हरि!' का कीर्तन करो। वृन्दावन की उपासना करो। अपने मन को श्री गुरु और वैष्णवों के ध्यान में डुबो दो।

जय रूप सनातन भट्ट रघुनाथ श्री-जीब गोपाल भट्ट दास रघुनाथ
अर्थ

जय हो रूप गोस्वामी, सनातन गोस्वामी, रघुनाथ भट्ट गोस्वामी, श्री जीव गोस्वामी, गोपाल भट्ट गोस्वामी और रघुनाथ दास गोस्वामी की।

जय ए-इ छय गोसाञीर करुम चरण बन्दन याहा हैते बिघ्न नाश अभीष्ट पूरण
अर्थ

इन छह गोस्वामियों के चरणों में दण्डवत् करो। उनके चरण ही बाधाओं का नाश करके इच्छाओं को पूर्ण करते हैं।

जय रस-नागरी जय नन्द-लाल जय जय मदन-मोहन श्री-गोपाल
अर्थ

जय हो श्री राधा की, रसमयी लीला की नायिका! जय हो श्री कृष्ण की, नन्द के पुत्र! जय जय हो उस गोपाल बालक कृष्ण की, जो कामदेव से भी अधिक मोहक हैं!

जय शची-सुत गौराङ्ग-सुन्दर जय नित्यानन्द पद्माबतीर कोँअर
अर्थ

जय जय हो सुंदर गौरांगसुंदर की, जो शची के पुत्र हैं! जय हो नित्यानन्द प्रभु की, जो पद्मावती के पुत्र हैं!

जय जय सीता-नाथ अद्वैत गोसाञी याहार करुणा-बले गोरा-गुण गा-इ
अर्थ

जय जय हो सीता के पति अद्वैत गोसाईं की! उनकी ही कृपा के बल से मैं गौर प्रभु की महिमा गाता हूँ।

जय जय श्रीबास जय गदाधर जय स्वरूप रामानन्द प्रेमेर सागर
अर्थ

जय जय हो श्रीवास की! जय हो गदाधर की! जय हो स्वरूप दामोदर और रामानंद राय की, जो प्रेमानंद के सागर के समान हैं!

जय जय सनातन जय श्री-रूप जय जय रघुनाथ प्राणेर स्वरूप
अर्थ

जय हो रूप गोस्वामी और सनातन गोस्वामी की! जय हो स्वरूप दामोदर गोस्वामी की, जो रघुनाथ दास गोस्वामी के प्राणस्वरूप हैं!

जय गौर-भक्त-बृन्द दया कर मोरे सबार चरण-धूलि धरि निज शिरे
अर्थ

जय हो गौर प्रभु के भक्तों की! हे भक्तगण, मुझ पर कृपा करें। मैं आप सबके चरणों की धूल लेता हूँ। वह धूल अपने मस्तक पर धारण करता हूँ।

जय जय नीलाचल-चन्द्र जगन्नाथ मो पापिरे दया करि कर आत्म-साथ
अर्थ

जय जय हो नीलाचल के चन्द्र भगवान जगन्नाथ की! हे प्रभु, कृपा करके इस पापी को अपने निज पार्षदों में स्वीकार करें।

जय जय गोपाल देब भकत-बत्सल नब घन जिनि तनु परम उज्ज्वल
अर्थ

जय जय हो भगवान गोपाल की, जो भक्तों से प्रेम करते हैं, और जिनका उज्ज्वल रूप नए बादलों से भी अधिक सुंदर है!

जय जय गोपीनाथ प्रभु प्राण मोर पुरी गोसाञीर लागि यार नाम क्षीर-चोर
अर्थ

जय जय हो श्री गोपीनाथ की, जो मेरे प्राण के समान प्रिय हैं! श्री माधवेन्द्र पुरी के लिए खीर चुराने के कारण इस विग्रह का नाम ‘क्षीरचोरा’ पड़ा।

श्री-गुरु-बैष्णब-पाद-पद्म करि आश नाम सङ्कीर्तन कहे नरोत्तम दास
अर्थ

अपने श्री गुरु और वैष्णवों के चरण-कमलों को ही एकमात्र लक्ष्य मानकर, नरोत्तम दास यह नाम-संकीर्तन का गीत गाते हैं।