Vaishnava Songs
नंदग्राम धाम
नंदग्राम धाम वैष्णव भजन · nandgramdham.org/songs/hi
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टेक्स्ट
जय जय मदन गोपाल बंशी-धारी त्रि-भङ्ग भङ्गिमा ठाम चरण-माधुरी
अर्थ

जय जय मदन गोपाल की, जो बांसुरी बजाते हैं, जिनका त्रिभंग रूप सौन्दर्य और माधुर्य का धाम है, और जिनके चरण मधुरता के धाम हैं।

जय जय श्री-गोबिन्द-मूर्ति मनोहर कोटि चन्द्र जिनि यार बरण सुन्दर
अर्थ

जय जय गोविन्द के मनोहर रूप की, जिसकी सुन्दर आभा करोड़ों चन्द्रमाओं को भी परास्त करती है।

जय जय गोपीनाथ महिमा प्रबल तमाल श्यामल अङ्ग पीन बक्षः-स्थल
अर्थ

जय जय महिमावान, शक्तिशाली गोपीनाथ की, जिनका वक्षस्थल विशाल है और जिनके अंग तमाल वृक्ष के समान श्याम हैं।

जय जय मथुरा-मण्डल कृष्ण-धाम जय जय गोकुल यार गोलक आख्यान
अर्थ

जय जय मथुरा-मण्डल की, जो कृष्ण का धाम है! जय जय गोकुल की, जो इस संसार में विख्यात है!

जय जय द्वादश बन कृष्ण-लीला-स्थान श्री-बन लौह भद्र भाण्डीर बन नाम
अर्थ

जय जय उन बारह वनों की, जहाँ कृष्ण लीला करते हैं, श्रीवन, लौहवन, भद्रवन और भाण्डीरवन आदि वनों की!

महाबने महानन्द पाय ब्रज-बासी याहाते प्रकट कृष्ण स्वरूप प्रकाशि
अर्थ

जय महावन की, जहाँ व्रजवासी महान आनन्द प्राप्त करते हैं। वहीं कृष्ण ने अपना स्वरूप इस संसार में प्रकट किया।

जय जय तालबन खदिर बहुला जय जय कुमुद काम्यबने कृष्ण-लीला
अर्थ

जय जय तालवन, खदिरवन और बहुलावन की! जय जय कुमुदवन और काम्यवन की, जहाँ कृष्ण अनेक लीलाएँ करते हैं!

जय जय मधुबन मधु-पान-स्थान यांहा मधु-पाने मत्त हैल बलराम
अर्थ

जय जय मधुवन की, जहाँ भगवान मधु पान करते हैं! वहीं बलराम मधु पीकर मत्त हो जाते हैं।

जय जय सर्ब-श्रेष्ठ श्री-बृन्दाबन देबेर अगोचर स्थान कन्दर्प-मोहन
अर्थ

जय जय श्री वृन्दावन की, जो सभी वनों में सर्वश्रेष्ठ है! वह स्थान कामदेव से भी अधिक मोहक है। देवता भी उस स्थान को नहीं समझ सकते।

जय जय ललिता-कुण्ड जय श्याम-कुण्ड जय जय राधा-कुण्ड प्रताप प्रचण्ड
अर्थ

जय जय ललिता-कुण्ड की! जय श्याम-कुण्ड की! जय जय राधा-कुण्ड की, जो परम गौरवमय है!

जय जय मानस-गङ्गा जय गोबर्धन जय जय दान-घाट लीला सर्बोत्तम
अर्थ

जय जय मानस-गंगा की! जय गोवर्धन की! जय जय दान-घाट की, जहाँ भगवान सबसे उत्तम लीलाएँ करते हैं!

जय जय नन्द-घाट जय अक्षर-बट जय जय चीर-घाट यमुना निकट
अर्थ

जय जय नन्द-घाट की! जय अक्षर-वट की! जय जय चीर-घाट की, जो यमुना के निकट है!

जय जय केशि-घाट परम मोहन जय बंशी-बट राधा-कृष्ण मनोरम
अर्थ

जय जय केशी-घाट की, जो परम मनोहर है! जय वंशी-वट की, जो श्री राधा-कृष्ण के हृदय को आनन्दित करता है!

जय जय राम-घाट परम निर्जन यांहा रास-लीला कैल रोहिणी-नन्दन
अर्थ

जय जय राम-घाट की, जो अत्यन्त निर्जन है! वहीं बलराम रास-लीला करते हैं।

जय जय बिमल-कुण्ड जय नन्दीश्वर जय जय कृष्ण-केलि पाबन-सरोबर
अर्थ

जय जय विमल-कुण्ड की! जय नन्दीश्वर की! जय जय पावन-सरोवर की, जहाँ कृष्ण अनेक लीलाएँ करते हैं!

जय जय याबट ग्राम अभिमन्यालय सखी सङ्गे रा-इ यांहा सदा बिराजय
अर्थ

जय जय यावट-ग्राम की, जो अभिमन्यु का घर है! वहाँ राधा और उनकी सखियाँ सदा विराजमान रहती हैं।

जय जय बृषभानु-पुर नामे ग्राम जय जय सङ्केट राधा-कृष्ण-लीला-स्थान
अर्थ

जय जय वृषभानु-पुर नामक ग्राम की! जय जय संकेट की, जहाँ राधा-कृष्ण अनेक लीलाएँ करते हैं!

श्री-गुरु-बैष्णब-पाद-पद्म करि आश नाम सङ्कीर्तन कहे नरोत्तम दास
अर्थ

अपने गुरु और वैष्णवों के चरण-कमलों को ही अपना एकमात्र लक्ष्य मानकर, नरोत्तम दास यह नाम-संकीर्तन गाते हैं।