Vaishnava Songs
नंदग्राम धाम
नंदग्राम धाम वैष्णव भजन · nandgramdham.org/songs/hi

जय राधा गिरि वर धारि

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जय राधा गिरि-वर धारि श्री नन्द-नन्दन वृषभानु-दुलारि (वृषभानु दुलारि राधे वृषभानु-दुलारि)
अर्थ

राधा और गिरिवर-धारी की जय! गिरिवर-धारी श्री नन्द-नन्दन हैं और राधा वृषभानु-दुलारी हैं।

मोर-मुकुट मुख मुरली जोरि वेणी विराजे मुखे हासि थोरि
अर्थ

गिरिवर-धारी ने मोर-पंख का मुकुट पहना है और उनके मुख से लगी बाँसुरी शोभा पा रही है। राधा की वेणी दमक रही है और उनके मुख पर हल्की-सी मधुर मुस्कान है।

उनकि शोहे गले वन-माला इनकि मोतिम-माल उजाला
अर्थ

गिरिवर-धारी के गले की शोभा वन-फूलों की माला से बढ़ रही है, जबकि राधा के गले की शोभा उनके मोतियों के हार की झिलमिलाती चमक से बढ़ रही है।

पीताम्बर जग-जन-मन मोहे नील उढनि बनि उनकि शोहे
अर्थ

गिरिवर-धारी का पीताम्बर जगत् के सब निवासियों के मन को मोह लेता है, और राधा के नीले वस्त्र तेज से जगमगाते हैं।

अरुण चरणे मणि-मञ्जिर बाओये श्री-कृष्ण-दास् तहिँ मन भाओये
अर्थ

उन दोनों के अरुण चरण-कमलों में रत्नजड़ित नूपुर झनक रहे हैं, और उनकी शोभामयी उपस्थिति से कृष्णदास का मन प्रकाशित हो उठा है।

इस भजन के बारे में

रचयिता
कृष्ण दास
पद
5

ऑडियो के लिए आभार: इस्कॉन डिज़ायर ट्री। सभी भक्त गायकों की जय।