जय राधे जय राधे राधे जय राधे जय श्री राधे
जय राधे जय राधे राधे जय राधे जय श्री-राधे! जय कृष्ण जय कृष्ण कृष्ण जय कृष्ण जय श्री-कृष्ण!
हे श्री राधे! आप श्यामा हैं, नई किशोरी, जिनकी कटि पतली है और जो नए यौवन की कान्ति से सुशोभित हैं। आप गोरी हैं, नित्य किशोरी हैं, और अपने प्रियतम की सर्वथा योग्य जोड़ी हैं। हे श्री कृष्ण! आप रसिक हैं, स्वयं रस से भरे हैं, छैल-छबीले हैं, और अपने गुणों पर गर्व करने वाले हैं।
हे श्री राधे! आप रास में विहार करती हैं, सब ओर रस का विस्तार करती हैं, और अपने प्रियतम को हृदय से लगाए रखती हैं। हे श्री कृष्ण! आप नित्य नई-नई लीलाओं में रमते हैं, त्रिभङ्ग मुद्रा में खड़े नवल किशोर हैं, और आपके श्याम अंग अत्यन्त सुन्दर हैं।
हे श्री राधे! आप प्राणों से भी प्यारी हैं, रूप से उजियारी हैं, और अत्यन्त सुकुमारी हैं। हे श्री कृष्ण! आप कामदेव के मन को भी मोह लेते हैं, महान आनन्द देते हैं, और सुन्दरों में भी सबसे सुन्दर हैं।
हे श्री राधे! विश्राम करते हुए भी आप शोभा की मूर्ति हैं, कामदेव जैसी मोहक छटा से दीप्त हैं, और कोयल जैसी मधुर वाणी बोलती हैं। हे श्री कृष्ण! आप कीर्तिमान हैं, युवा गोपियों के प्रियतम हैं, और स्वयं श्री भगवान हैं।
हे श्री राधे! आपका मुख चन्द्रमा जैसा है, आपके दाँत कुन्द की कलियों जैसे हैं, और आप शोभा का धाम हैं। हे श्री कृष्ण! आप परम उदार हैं, आपकी प्रभा अपार है, और आप अत्यन्त सुकुमार हैं।
हे श्री राधे! आप हंस जैसी चाल से चलती हैं, दीप्तिमान प्रियतमा के रूप में शोभित हैं, और प्रेम-क्रीड़ाओं की रचना करती हैं। हे श्री कृष्ण! आपका रूप रस से भरा है, आपके नेत्र विशाल हैं, और आप परम कृपालु हैं।
हे श्री राधे! आप सोने की लता हैं, दिव्य प्रेम-रस से छलकती हैं, और अनुपम रूप से अलबेली हैं। हे श्री कृष्ण! आप सब सुखों के सागर हैं, सब गुणों की खान हैं, और आपका रूप जगमगाता है।
हे श्री राधे! आप परम रमणीय प्रियतमा हैं, हर प्रकार से सबसे बढ़कर हैं, और आपके गुण मन की पहुँच से परे हैं। हे श्री कृष्ण! आप अपने धाम में निवास करते हैं, सब ओर प्रभा फैलाते हैं, और सहज ही मधुर मुस्कान वाले हैं।
हे श्री राधे! आप स्वयं ह्लादिनी शक्ति हैं, अत्यन्त प्रिय वचन बोलती हैं, और हृदय को प्रेम में उन्मत्त कर देती हैं। हे श्री कृष्ण! आपका अंग-अंग मोह लेने वाला है, आप रस से भरे और सलोने हैं, और सौभाग्यशाली तथा सुडौल हैं।
हे श्री राधे! आप “राधा” नाम से विभूषित हैं, अपने गुणों से सबको आनन्द देती हैं, और हरि की प्रिया स्वामिनी हैं। हरे हरे हरि, हरे हरे हरि, हरे हरे हरि, श्री कृष्ण!