Nandgram Dham
Vaishnava Songs · nandgramdham.org/songs
कलयति नयनं
AI-निर्मित अनुवाद — समीक्षा लंबित
कलयति नयनं दिशि दिशि वलितम्
पङ्कजम् इव मृदु-मारुत-चलितम्
अर्थ
उसकी आँख, हर दिशा में घूमती हुई, मन्द वायु से धीरे हिलते कमल-पुष्प जैसी लगती है।
केलि-विपिनं प्रविशति राधा
प्रतिपद-समुदित-मनसिज-बाधा
अर्थ
राधा क्रीड़ा-वन में प्रवेश करती है, हर एक कदम पर कामदेव के बाणों की पीड़ा नए सिरे से उभर आती है।
विनिदधति मृदु-मन्थर-पादं
रचयति कुञ्जर-गतिम् अनुवादम्
अर्थ
अपने पैर धीरे-धीरे, कोमलता से एक के बाद एक रखती हुई, वह हथिनी की चाल की ही प्रतिध्वनि करती हुई चलती है।
जनयति रुद्र-गजाधिप-मुदितं
रामानन्द-राय-कवि-गदितम्
अर्थ
उसकी चाल तो गजराज को भी मोहित कर दे, ऐसा कवि रामानन्द राय द्वारा रचित यह श्लोक कहता है।