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कलयति नयनं

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AI-निर्मित अनुवाद — समीक्षा लंबित

कलयति नयनं दिशि दिशि वलितम् पङ्कजम् इव मृदु-मारुत-चलितम्
अर्थ

उसकी आँख, हर दिशा में घूमती हुई, मन्द वायु से धीरे हिलते कमल-पुष्प जैसी लगती है।

केलि-विपिनं प्रविशति राधा प्रतिपद-समुदित-मनसिज-बाधा
अर्थ

राधा क्रीड़ा-वन में प्रवेश करती है, हर एक कदम पर कामदेव के बाणों की पीड़ा नए सिरे से उभर आती है।

विनिदधति मृदु-मन्थर-पादं रचयति कुञ्जर-गतिम् अनुवादम्
अर्थ

अपने पैर धीरे-धीरे, कोमलता से एक के बाद एक रखती हुई, वह हथिनी की चाल की ही प्रतिध्वनि करती हुई चलती है।

जनयति रुद्र-गजाधिप-मुदितं रामानन्द-राय-कवि-गदितम्
अर्थ

उसकी चाल तो गजराज को भी मोहित कर दे, ऐसा कवि रामानन्द राय द्वारा रचित यह श्लोक कहता है।