Vaishnava Songs
नंदग्राम धाम
नंदग्राम धाम वैष्णव भजन · nandgramdham.org/songs/hi

कुन्दन कनया कलेबर कान्ति

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कुन्दन कनया कलेबर-कान्ति प्रति अङ्गे अबिरल पुलकको पान्ति
अर्थ

उनका शरीर स्वर्ण के समान कांतिमान है। उनके प्रत्येक अंग पर रोमांच से रोम-रोम खड़े हो जाते हैं।

प्रेम-भरे ढर ढर लोचन चाय कतहुं मन्दाकिनी तन्हि बहि याय
अर्थ

उनके नेत्रों से प्रेमोन्माद के अश्रुओं की दिव्य गंगा बहती है।

देख देख गौर गुण-मणि करुणाय को बिहि मिलायल आनि
अर्थ

देखो! देखो भगवान गौर को! किसने उन्हें यह दिव्य करुणा दी? किसने उन्हें समस्त सद्गुणों के आभूषण पहनाए?

जपि जपाये मधुर निज नाम गा-इ गाओयये आपन गुण-गाम
अर्थ

वे स्वयं अपने ही मधुर नामों का जाप करते हैं और दूसरों को भी जाप करवाते हैं। वे स्वयं अपनी महिमा के गीत गाते हैं और दूसरों को भी वे गीत गवाते हैं।

नाचि नाचाओये बधिर जड अन्ध कतिहुं ना पेखों ऐछन परबन्ध
अर्थ

वे नाचते हैं। वे बहरों, गूंगों और अंधों को भी नचा देते हैं। मुझे इन लीलाओं की कोई व्याख्या समझ में नहीं आती।

आपहिं भोरि भुबन करु भोर निज पर नाहि सबारे दे-इ कोर
अर्थ

वे स्वयं आनंद में विभोर हैं। वे समस्त लोकों को भी आनंद में विभोर कर देते हैं। इस विभोरता में कोई नहीं जानता कि वह स्वयं कौन है और दूसरे कौन हैं।

भासल प्रेमे अखिल नर-नारी गोबिन्द दास कहे याँअ बलिहारि
अर्थ

इस संसार के समस्त स्त्री-पुरुष अब दिव्य प्रेम के सागर में तैर रहे और बह रहे हैं। गोविन्द दास कहते हैं: मैं अपना सर्वस्व भगवान गौर को समर्पित करता हूं।