Vaishnava Songs
नंदग्राम धाम
नंदग्राम धाम वैष्णव भजन · nandgramdham.org/songs/hi

मरि या इ एमन निता इ केन ना भजिनु

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मरि या-इ एमन निता-इ केन ना भजिनु हरि हरि धिक् आरे कि बुद्धि लागिल मोरे हाते निधि पाञा हारा-इनु
अर्थ

मेरा मरना ही अच्छा है। मैंने निताई प्रभु की आराधना नहीं की। हाय! हाय! मैं कितना तुच्छ हूँ! मैं क्या सोच रहा था? मेरे हाथ में अमूल्य धन था, और फिर मैंने उसे खो दिया।

कमल जिनिया आङ्खि शोभा करे मुख-शशी सकरुण सब पाने चाय बाहु पासरिया बले आ-इस जीब करि कोले प्रेम-धन सबारे बिलाय
अर्थ

उनके मुखचंद्र में वे आँखें चमकती हैं, जो कमल के फूलों को भी हरा देती हैं, और जो हर जीव को करुणा से निहारती हैं। अपनी बाहें फैलाकर और 'आओ!' कहकर पुकारते हुए, वे पतित जीवों को अपनी छाती से लगा लेते हैं। सबको वे प्रेमोल्लास का धन प्रदान करते हैं।

काछनि कटिर बेश शोभिछे चाञ्चर केश बण्धे चूडा अति मनोहरे नाटुया ठमके चले बुज बाहि पडे लोरे त्रिबिध जीबेर ताप हरे
अर्थ

उनकी कमर पर एक वस्त्र सुंदरता से लिपटा हुआ है। उनके चमकते बाल कुंचित हैं। वे एक सुंदर पगड़ी धारण करते हैं, जो हृदय को मोहित कर लेती है। वे एक सुंदर नर्तक के समान चलते हैं। उनकी छाती पर आँसू बहते हैं। वे बद्ध जीवों के त्रिविध दुखों को दूर कर देते हैं।

हरि बल बोल बले डाहिने बामे अङ्ग दोले राम गौरी-दासेर गला धरि मुखे माखा हास्य-चान्द निता-इर प्रेम-फान्द भाब-सिन्धु उछल लहरी
अर्थ

'हरिबोल!' वे पुकारते हैं। उनका शरीर दाईं और बाईं ओर झूमता है। उनकी बाहें रामाई और गौरीदास के कंधों पर टिकी हैं। मुस्कान का चंद्रमा उनके मुख पर छाया रहता है। निताई प्रभु ने प्रेम का जाल बिछाया है। वे प्रेमोल्लास की उठती लहरों से इधर-उधर बहते हैं।

निता-इ करुणा-सिन्धु पतितेर एक बन्धु करुणाय जगत डुबिल मदन मेअदेते अन्ध बिषये रहल बन्ध हेन निता-इ भजिते ना प-इल
अर्थ

निताई प्रभु करुणा के सागर हैं। वे पतित जीवों के एकमात्र मित्र हैं। उन्होंने संपूर्ण ब्रह्मांड को अपनी करुणा के सागर में डुबो दिया है। केवल वे लोग, जो काम से अंधे हैं और भौतिक कामनाओं की रस्सियों से जकड़े हुए हैं, निताई प्रभु की आराधना नहीं करेंगे।

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