Vaishnava Songs
नंदग्राम धाम
नंदग्राम धाम वैष्णव भजन · nandgramdham.org/songs/hi

मिलत नहिं ऐसा दुर्लभ जन्म

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मिलत नहिं ऐसा दुर्लभ जन्म, भ्रमत ही चौदह भुवन किसी को मिलते है अहो भाग्य से, हरि भक्तोँ के दर्शन
अर्थ

हे मन, बस सद्गुरु के चरण-कमलों की सेवा करो। पतित जीव चौदह भुवनों में भ्रमण करता रहता है, और उसे मनुष्य जन्म पाने का अवसर बड़ी कठिनाई से मिलता है। अहो! इतने सारे मनुष्यों में से कोई विरला ही हरि के भक्तों के दर्शन का महाभाग्य प्राप्त करता है।

कृष्ण कृपा की आनन्द मूर्ति, दीनन करुणा-निधान ज्ञान-भक्ति-प्रेम तीनो प्रकाशत, श्री गुरु पतित पावन
अर्थ

हे मन, बस सद्गुरु के चरण-कमलों की सेवा करो। श्री गुरु कृष्ण की कृपा के आनन्द के साकार रूप हैं, इसलिए वे संसार में दुःख भोगते दीन जीवों के लिए करुणा के भंडार हैं। वे दिव्य ज्ञान, शुद्ध भक्ति और प्रेम, इन तीनों को प्रकट करते हैं। श्री गुरु पतित बद्ध जीवों के उद्धारक हैं।

श्रुति-स्मृति इति भाष्य सभी मिले, देखत स्पष्ट प्रमाण तन-मन-जीवन गुरु-पदे अर्पण, सदा श्री हरि-नाम रटन
अर्थ

हे मन, बस सद्गुरु के चरण-कमलों की सेवा करो। श्रुति-शास्त्र, स्मृति-शास्त्र और महान आचार्यों की व्याख्याएँ, सब मिलकर उनकी महिमा का स्पष्ट प्रमाण देते हैं। बस अपना तन, मन और जीवन श्री गुरु के चरणों में अर्पित कर दो, और सदा श्री हरि-नाम जपते रहो।