नाचे गोरा प्रेमे भोरा
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3 रिकॉर्डिंगप्रेमोल्लास से अभिभूत होकर गौर प्रभु नृत्य करते हैं। एक क्षण वे 'हरि!' कहकर पुकारते हैं। दूसरे क्षण वे वृन्दावन के स्मरण में मग्न हो जाते हैं। क्षण-क्षण वे श्री राधा का भाव धारण करते हैं, जो कृष्ण के प्राणों की स्वामिनी हैं।
यावक के रंग का एक वस्त्र उनकी कमर पर शोभा से लिपटा है। कभी-कभी वे 'यमुना!' कहकर गंगा की ओर दौड़ पड़ते हैं।
'था थै! ता थै!' मृदंग बोल उठते हैं। 'झन झन!' करताल कहते हैं। गौर प्रभु के कमल-नयनों से आँसुओं की गंगा बहती है। उनके गले में वनमाला झूमती है।
गौरचंद्र प्रभु समस्त आनंद के मूल हैं। जिन भक्तों के पास उनके अतिरिक्त कोई धन नहीं है, उन पर वे अत्यंत दयालु हैं। कृष्णदास उनके चरण-कमलों की छाया पाने के लिए तरसते हैं।
ऑडियो के लिए आभार: इस्कॉन भक्त। सभी भक्त गायकों की जय।