Vaishnava Songs
नंदग्राम धाम
नंदग्राम धाम वैष्णव भजन · nandgramdham.org/songs/hi

निता इ चैतन्य दुटी भा इ दयार अबधि

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निता-इ चैतन्य दुटी भा-इ दयार अबधि शिब ब्रह्मार दुर्लभ प्रेम याचे निरबधि
अर्थ

चैतन्य और निताई, दोनों भाई, करुणा की चोटी पर खड़े हैं। जिस दुर्लभ प्रेम को ब्रह्मा और शिव भी पाना कठिन समझते हैं, उसे ये दोनों भाई बार-बार सहज ही बाँट देते हैं।

चारि बेदे अन्वेषये ये प्रेम पा-इते हेन प्रेम दुटी भा-इ याचे अबिरते
अर्थ

जिस शुद्ध प्रेम को चारों वेद ढूँढते रहते हैं, उसी प्रेम को ये दोनों भाई बार-बार खुले हाथों बाँट देते हैं।

पतित दुर्गत यत कलि-हत यारा निताइ चैतन्य बलि नाचे गाय तारा
अर्थ

कलियुग से त्रस्त पतित और भ्रमित जीव अब 'निताई-चैतन्य' पुकारकर नाचते हैं।

भुबन-मङ्गल भेल सङ्कीर्तन-रसे राय अनन्त कान्दे ना पा-इया शेषे
अर्थ

संकीर्तन के रस का आस्वादन कर अब सारे लोक मंगलमय हो गये हैं। अनन्त राय रो रहे हैं, क्योंकि वे ही उस रस का आस्वादन नहीं कर सके।