Vaishnava Songs
नंदग्राम धाम
नंदग्राम धाम वैष्णव भजन · nandgramdham.org/songs/hi
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1 टेक
श्री-अद्वैतचन्द्र भूप मोर गौर-प्रेम-भरे गर गर अन्तर अबिरत अरुण-नयाने झरे लोर
अर्थ

श्री अद्वैतचन्द्र मेरे स्वामी हैं। उनका हृदय भगवान गौर के प्रेम से अभिभूत रहता है। उनके लाल हुए नेत्रों से अश्रु निरन्तर बहते रहते हैं।

पुलकित ललित अङ्ग झलमल कत दिनकर-निकर निन्दि बर ज्योति कुञ्जर-गमन दमन मनो-रञ्जन हसत सुलसत दशन जनु मोति
अर्थ

उनके शरीर के रोम खड़े हो जाते हैं। उनके जगमगाते अंग कितने ही सूर्यों की चमक को फीका कर देते हैं। वे गजराज के समान सुन्दर चाल से चलते हैं। उनकी मुस्कान हृदय को मोह लेती है। उनके सुन्दर दाँत मोतियों की तरह चमकते हैं।

सिंह-गरब-हर गरजत घन घन कम्पित कलि दूरे दुरजन गेल प्रबल प्रतापे ताप-त्रय कुण्ठित जग-जन परम हरिष-हिया भेल
अर्थ

उनकी गर्जना सिंह की गर्जना के अभिमान को भी हर लेती है। उनकी गर्जना से कलियुग कांप उठता है और दुष्ट भाग जाते हैं। उनका पराक्रम और महिमा त्रिविध दुःखों को शान्त कर देते हैं और संसार के लोगों के हृदय को आनन्दित करते हैं।

करुणा-जलधि उमडि चहुं-दिश पामर पतित भकति-रसे भासि नरहरि कुमति कि बुझिब रङ्ग नब गौर-चरित गुण भुबने प्रकाशि
अर्थ

वे करुणा के सागर हैं, जो चारों दिशाओं में उमड़ पड़ता है। वे पतित पापियों को भी भक्ति के अमृत में तैरा देते हैं। मूर्ख नरहरि दास उनकी आनन्दमयी महिमा को क्या जाने? अद्वैत प्रभु ही भगवान गौर की लीलाओं को इस जगत में लाए।