नंदग्राम धाम
वैष्णव भजन · nandgramdham.org/songs/hi
श्रीमद् अद्वैत मुद सदन गुण भूप
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गाते समय
श्रीमद् अद्वैत मुद-सदन गुण-भूप
कनक-भूधर-गरब-हारी बर-रूप
अर्थ
गौरवशाली अद्वैत आचार्य आनन्द के धाम और गुणों के राजा हैं। उनका दिव्य रूप सुवर्ण-पर्वत के अभिमान को भी हर लेता है।
झलकत सु-ललित अबिरल पुलक पान्ति
सघने गरजत गौर-प्रेम-रसे माति
अर्थ
प्रेम की उमंग में उनके भव्य और सुन्दर शरीर के रोम पुलकित हो उठते हैं। भगवान गौर के प्रेम का अमृत पाकर वे आनन्द से उन्मत्त होकर ऊँचे स्वर में गरजते हैं।
बिदित ब्रह्माण्ड मधि बिक्रम अपार
प्रबल पाषाण्ड कुल दल-इ अनिबार
अर्थ
इस संसार में उनके पराक्रम का कोई सानी नहीं है। वे शक्तिशाली पाषण्डियों को निरन्तर चूर-चूर कर देते हैं।
भब-भय-बिभञ्जन महा-करुणा-धाम
पतित-पाबन पहुंक निछनि घनश्याम
अर्थ
वे इस जन्म-मृत्यु के संसार के समस्त भय को नष्ट कर देते हैं। वे महान करुणा के धाम हैं। घनश्याम दास पतितों के उद्धारक अद्वैत आचार्य की आराधना करते हैं।
इस भजन के बारे में
- पद
- 4