श्यामर गौर बरण एक देह
एक ही देह में श्याम वर्ण और गौर वर्ण दोनों प्रकट हुए हैं। मूर्ख और पापी जन इसे देखकर सन्देह से भर उठे हैं।
वह रूप मधुर सुगन्ध से भरा है। वह पके आम के फलों से युक्त वृक्ष के समान सुगन्धित है।
पूर्व जन्म में वे एक गोप थे, अब वे इस संसार में ब्राह्मण रूप में अवतरित हुए हैं। वेद-शास्त्र भी उनकी गूढ़ लीलाओं को स्पर्श नहीं कर सकते।
वे खुलकर श्रीकृष्ण के नाम-कीर्तन की महिमा का प्रचार करते हैं। अब संसार के स्त्री-पुरुषों के मुख से केवल यही नाम सुनाई पड़ता है, और कुछ नहीं।
तीनों लोक अब इस पुरुष के चरण-कमलों के मधु का पान कर रहे हैं। कविरञ्जन यह मधुर गीत गाते हैं।