Vaishnava Songs
नंदग्राम धाम
नंदग्राम धाम वैष्णव भजन · nandgramdham.org/songs/hi

श्यामेर तनु अब गौर बरण

टेक
श्यामेर तनु अब गौर-बरण गोकुल छोडि अब नदीया आ-ओल बंशी छोडि कीरतन
अर्थ

जिनका शरीर श्याम था, उनका वर्ण अब गौर हो गया है। गोकुल को छोड़कर वे नदिया आए हैं। बाँसुरी छोड़कर वे अब पवित्र नामों का कीर्तन करते हैं।

कालिन्दी-तट छोडि सुरसरित्-तटे अबहुं करत बिलास अरुण-बरण डोर-कौपीन अब छोडि पीत-धडा बास
अर्थ

यमुना को छोड़कर वे गंगा के तट पर आए। वहाँ वे लीलाएँ करते हैं। पीले वस्त्र छोड़कर अब वे संन्यासी का केसरिया वस्त्र पहनते हैं।

बामे नहत अब रा-इ सुधा-मुखी ब्रज-बधू नहत नियडे गदाधर पण्डित फिरत बामे अब सदा स-ए भकत बिहरे
अर्थ

मधुर मुख वाली राधा अब उनकी बायीं ओर नहीं हैं। व्रज की गोपियाँ अब उनके आसपास नहीं हैं। अब गदाधर पण्डित उनकी बायीं ओर हैं। अब वे सदा अपने भक्तों के साथ लीलाएँ करते हैं।

छोडि मोहन चूडा शिरे शिखा राखल मुखे कहत रारा रारा कहे हरि-बल्लभ तेरछ चाहनि दु-नयने गलत धारा
अर्थ

उन्होंने अपने शोभायमान केश त्याग दिए। अब वे शिखा धारण करते हैं। अपने मुख से अब वे ऊँचे स्वर में पवित्र नामों को पुकारते हैं। हरि-वल्लभ कहते हैं: तिरछी, चंचल चितवन को छोड़कर अब वे अपनी दोनों आँखों से आँसुओं की उमड़ती नदियाँ बहाते हैं।

इस भजन के बारे में

पद
4