तपत काञ्चन कान्ति कलेबर
उनका गौर शरीर तपे हुए सोने के समान चमकता है। उनका नृत्य भँवर की बड़ी लहरों के समान है। उनकी सुडौल बाहें गजराज की सूँड़ को भी पराजित कर देती हैं। विधाता ने उन्हें बड़े आनंद से गढ़ा है।
गौरांग का सुंदर रूप संसार के हर हृदय को मोहित कर लेता है। अपनी ही शक्ति से उन्होंने स्रष्टा ब्रह्मा को उत्पन्न किया। सती स्त्रियों को वे आध्यात्मिक आनंद से चकित कर देते हैं।
सिर से पैर तक उनके रोम खड़े हो जाते हैं। उनकी आँखों से प्रेम के आँसू बहते हैं। अपनी ही महिमा सुनकर वे प्रेम से विभोर हो जाते हैं। उन्हें देखकर पशु-पक्षी भी प्रेम से रो पड़ते हैं।
उनकी मधुर और कोमल मुस्कान चंद्रमा की चमक, चमेली और कमल के फूलों को भी हरा देती है। उनके मधुर वचन अमृत की वर्षा हैं। अनंत दास उनकी महिमा का वर्णन करते हैं।