नंदग्राम धाम
वैष्णव भजन · nandgramdham.org/songs/hi
तेज मन हरि बिमुखन्कि सङ्ग
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तेज मन हरि-बिमुखन्कि सङ्ग
याक सङ्गहि कुमति उपजतहि
भजन कि पडत बिभङ्ग
अर्थ
हे मेरे मन, जिन लोगों ने हरि से मुख फेर लिया है, उनका संग त्याग दो। उनके संग से मन में बुरे विचार जन्म लेंगे। उनका संग भगवान के प्रति तुम्हारी भक्ति को खण्ड-खण्ड कर देगा।
सतत असत पथ ले-इ यो यायत
उपजत कामिनी सङ्ग
शमन-दूत परमायु परखत
दूर सञे नेहार-इ रङ्ग
अर्थ
उनका संग तुम्हें सदा कुमार्ग पर चलाएगा, तुम्हें वासना से भरी स्त्रियों के संग में डालेगा, और दूर से देख रहे यमदूतों को प्रसन्न करेगा।
अत एब से हरि-नाम सार परम मधु
पान करह छोडि भङ्ग
हरि-चरण-सरोरुह माति रहुं
गोपल-दास-मन भृङ्ग
अर्थ
इसलिए ऐसे लोगों का संग त्याग दो। इसके बदले हरि के पवित्र नाम की मधुर मधु का पान करो। आह! गोपाल दास का हृदय अब हरि के चरण-कमल की मधु का स्वाद लेकर मत्त भ्रमर बन गया है।
इस भजन के बारे में
- पद
- 3