Vaishnava Songs
नंदग्राम धाम
नंदग्राम धाम वैष्णव भजन · nandgramdham.org/songs/hi

अगेयान ध्वान्त दुरन्त निमगन

अगेयान-ध्वान्त दुरन्त निमगन अखिल लोक नेहारि कोन बिहि नबद्वीप दे-ओल उजोर दीपक जारि
अर्थ

समस्त लोकों को अज्ञान के असहनीय अन्धकार में डूबा हुआ देखकर उन्होंने नवद्वीप में एक जगमगाता दीपक रख दिया।

टेक
सब दिग दरशन भेल किरणे झलमल बहिर अन्तरे तिमिर सब दूरे गेल
अर्थ

अब सभी दिशाएँ साफ़ दिखाई देने लगी हैं। वह जगमगाती ज्योति भीतर और बाहर चमकती है। सारा अन्धकार दूर भाग गया है।

कु-पथ परिहरि साधु-पन्थ पथिक परिचय रन्ँअ नाम-हेमक दाम पहिरल प्रेम-मणिखानि सङ्ग
अर्थ

अब सबने बुरा मार्ग छोड़ दिया है। अब सब आनन्द से सन्तों के मार्ग पर चलते हैं। सबने भगवान के पवित्र नामों का सोने का हार पहन लिया है, ऐसा हार जिसके रत्न दिव्य प्रेम के आनन्दोल्लास हैं।

दुलह सम्पदे दीन दुरगत जगत भरि परिपूर जनम आन्धल एकलि रहु हास जगत बाहिर दूर
अर्थ

अब भटके हुए दीन लोग उस महान आध्यात्मिक धन से सम्पन्न हो गए हैं। सारा संसार उस धन से भर गया है। केवल एक अकेला व्यक्ति, जो जन्म से अन्धा है, उस धन के संसार से बाहर रह गया है।

इस भजन के बारे में

रचयिता
जगदानन्द
पद
4