Vaishnava Songs
नंदग्राम धाम
नंदग्राम धाम वैष्णव भजन · nandgramdham.org/songs/hi

गौर कलेबर मौलि मनोहर चिकुर ऐछे नेहारि

गौर-कलेबर मौलि मनोहर चिकुर ऐछे नेहारि जनु हेम महीधर शिखरे चामर दे-इ उर-पर डारि
अर्थ

मैं भगवान गौर के केश, सिर और शरीर को निहारता हूँ, जो सोने के पर्वत के शिखर और चामर (चँवर) जैसे लगते हैं।

पीन उर उपनीत कृत उपबीत, सीतिमा रङ्ग जनु कनया भूधर, बेढि बिलस-इ, सुर-तरङ्गिनी गङ्ग
अर्थ

उनका शोभायमान चौड़ा वक्ष, जिस पर जनेऊ सुशोभित है, ऐसा है जैसे कोई सोने का पर्वत हो, जहाँ लहरों से भरी, जगमगाती गंगा बह रही हो।

आध अम्बर आध सम्बर आध अङ्ग सु-चोर जनु जलद सञे, अति बाल-रबि-च्छबि, निकसे अधिक उजोर
अर्थ

उनके शोभायमान अंग आधे वस्त्र से ढके हैं, और वे बादलों के पीछे से चमकते हुए उगते सूर्य जैसे लगते हैं।

जगत आनन्द पहुङ्क पद-नख, लख-इ ऐछन छन्द जनु मीनकेतन, करु निर्मञ्छन, चरणे दे-इ दश चन्द
अर्थ

भगवान गौर के चरणों के नख, जो सब लोकों को आनन्द देते हैं, ऐसे लगते हैं मानो पुजारी कामदेव आरती कर रहे हों और भगवान गौर के चरणों के सामने दस चन्द्रमा रख रहे हों।

इस भजन के बारे में

रचयिता
जगदानन्द
पद
4