Vaishnava Songs
नंदग्राम धाम
नंदग्राम धाम वैष्णव भजन · nandgramdham.org/songs/hi

अखिल भुबन भरि हरि रस बादर

अखिल भुबन भरि हरि रस-बादर बरिखये चैतन्य-मेघे भकत चातक यत पिबि पिबि अबिरत अनुखँअ प्रेम-जल मागे
अर्थ

प्रभु चैतन्य रूपी मेघ अब सारे लोकों को भगवान कृष्ण के पवित्र नामों की अमृत वर्षा से भर रहे हैं। इस वर्षा का अमृत बिना रुके पीते हुए भक्त रूपी चातक पक्षी हर क्षण प्रेम के अमृत-जल की प्रार्थना करते रहते हैं।

फाल्गुन पूर्ँइमा तिथि मेघेर जनम तथि से-इ मेघे करल बादर उचा-नीच यत छिल प्रेम-जले भासा-ओल गोरा बड दयार सागर
अर्थ

फाल्गुन मास की पूर्णिमा के दिन प्रभु चैतन्य रूपी मेघ का जन्म हुआ। उसी क्षण उस मेघ ने बड़ी वर्षा शुरू कर दी। ऊँच-नीच हर प्राणी प्रेम के जल की उस बाढ़ में बहने लगा। इस प्रकार प्रभु गौर ने दया के विशाल सागर से जगत् को भर दिया।

जीबेरे करिया यन्त्र हरि-नाम महा-मन्त्र हाते हाते प्रेमेर अँजलि अधम दुःखित यत तार हैले भागबत बाढिल गौराङ्ग-ठाकुराली
अर्थ

प्रेम से हाथ जोड़कर उन्होंने पतित जीवों को हरिनाम महामंत्र दिया। इस प्रकार प्रभु गौरांग ने दुःखी और पतित लोगों को उत्तम भक्त बना दिया।

जगा-इ माधा-इ छिल तार प्रेमे उद्धारिल हेन जीबे बिला-ओल दया दास शिबानन्द बले केन र-इनु माया-भोले प्रभु मोरे देह पद-च्छाया
अर्थ

उन्होंने जगाई और माधाई को बड़े प्रेम से उबार लिया। उन जैसे सब पतित जीवों पर उन्होंने दया बरसाई। शिवानन्द दास कहते हैं: मैं माया के भुलावे में क्यों पड़ा हूँ? हे प्रभु, मुझे अपने चरणों की छाया दीजिए।

इस भजन के बारे में

रचयिता
शिवानन्द
पद
4