Vaishnava Songs
नंदग्राम धाम
नंदग्राम धाम वैष्णव भजन · nandgramdham.org/songs/hi

पूर्बे ये इ गोपीनाथ श्रीमती राधिका साथ

पूर्बे ये-इ गोपीनाथ श्रीमती राधिका साथ से सुख भाबिया एबे दीन ये करे मुरली बाय दँड कमँडलु ताय कटि-तटे ए डोर कौपीन
अर्थ

जो पहले राधा के साथी और गोपियों के स्वामी थे, वे अब उस सुख को याद करके दीन भिक्षु बन गए हैं। जो पहले हाथ में बाँसुरी बजाते थे, वे अब दण्ड और कमण्डलु धारण करते हैं। उनकी कमर पर कौपीन बँधा है।

अधरे मुरली पूरि ब्रज-बधूर मन चुरि करि सुख बाडये ताहार नयन-कटाक्ष-बाँए मरमे पशिया हाने से मारँए बहे अश्रु-धार
अर्थ

जो पहले अपने अधरों पर बाँसुरी रखकर बजाते थे, व्रज की गोपियों के मन चुराते थे, अनेक आनन्दमय लीलाएँ करते थे और गोपियों के हृदयों पर तिरछी चितवन के बाण चलाते थे, वे अब अपने नेत्रों से आँसुओं की बाढ़ बहाते हैं।

यमुनार बने बने गो-धन राखाल सने नट-बेश बिजयी बाखाने नाहि जानि से-इ एबे कि जानि काहार भाबे बिलासये सङ्कीर्तन स्थाने
अर्थ

जो पहले नट का वेश धारण करके गायें चराते हुए यमुना के किनारे वन-वन घूमते थे, वे अब प्रेमानन्द में डूबे रहते हैं। संकीर्तन की लीलाएँ करते हुए वे प्रेमानन्द के सिवा कुछ नहीं जानते।

भाबिते से सब सुख द्वि-गुँअ बाडये दुख बिरह अनले जरि जरि ए शिबानन्देर हिया गडिल पाषाँअ दिया नाद-रबे से सुख सोभरि
अर्थ

मिलन के आनन्द में वे सुख से भर जाते हैं। विरह की पीड़ा में उनका दुःख दुगुना हो जाता है। फिर वे दुःख की ज्वाला में जलते हैं। उनके पवित्र नामों के कीर्तन की ध्वनि शिवानन्द के हृदय को भी आनन्द से भर देती है, जो पत्थर से बना हृदय है।

इस भजन के बारे में

रचयिता
शिवानन्द
पद
4