आसलो कथा बोल्ते
हरे कृष्ण! इन वैष्णव भजनों का हिन्दी अनुवाद अभी हमारी ओर से पूरी तरह सत्यापित नहीं किया गया है। यह अनुवाद कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) द्वारा किया गया है, इसलिए इसमें कोई त्रुटि हो सकती है। यदि आपको कोई भूल दिखे, तो कृपया हमें क्षमा करें। हम प्राथमिकता के साथ सभी भजनों की समीक्षा करने का प्रयास कर रहे हैं।
Listen
2 versionsAudio courtesy of ISKCON Desire Tree. All glories to the devotee singers.
अरे! तू अपने को कितना सच्चा बताता है! तू पुरानी फटी कन्था लपेटे और लंगोटी बाँधे हुए त्यागी साधु जैसा दिखता है, परन्तु यह सब केवल दिखावा है।
अपनी धर्मपत्नी को घर में छोड़कर तू दूसरों की स्त्रियों की संगति करता है। धन के लोभ में तू द्वार-द्वार भिखारी की तरह घूमता है, और चुपके से इतना धन छिपाकर भी रखता है।
तू बड़े विश्वास से अपने को निष्कपट साधु-गुरु बताता है, और भोले-भाले लोगों के कान में कृष्ण-नाम देकर उन्हें दीक्षा देता रहता है। क्या यह सब पाखण्ड नहीं है?
क्या कोई केवल दूसरों को उपदेश देने से 'गुरु' कहलाने योग्य हो जाता है? जहाँ दूध चाहिये, वहाँ रसोइया कभी छाछ का प्रयोग नहीं कर सकता। अब इस पर विचार करके स्वयं देख, जो मैं देख रहा हूँ।
शम, दम और सहनशीलता के सच्चे गुणों के बल से जब श्रद्धा उदय होती है, तब सांसारिक कामनाएँ स्वयं छूट जाती हैं। ऐसी स्थिति में त्यागी चाँद बाउल कहते हैं: तेरी इस अधपकी नकली सिद्धि का क्या होगा?