Vaishnava Songs
नंदग्राम धाम
नंदग्राम धाम वैष्णव भजन · nandgramdham.org/songs/hi

बिरले बसिया एकेश्वर

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टेक्स्ट
बिरले बसिया एकेश्वर हरि-नाम जपे निरन्तर
अर्थ

एकान्त स्थान में रहकर भगवान् स्वयं निरन्तर श्रीकृष्ण के पवित्र नामों का जप करते हैं।

सब-अबतार-शिरोमणि अकिञ्चन-जन-चिन्तामणि
अर्थ

वे सभी अवतारों के शिरोमणि हैं। वे उन सभी अकिंचन संन्यासियों के लिए चिन्तामणि रत्न हैं, जिनकी एकमात्र सम्पत्ति कृष्ण हैं।

सुगन्धि चन्दन माथा गाय धूलि बिनु आन नाहि भाय
अर्थ

सिर और अंगों पर सुगन्धित चन्दन के स्थान पर अब उन्हें धूल के सिवा और कुछ नहीं भाता।

मणिमय रतन भूषण स्वपने ना करे परशन
अर्थ

स्वप्न में भी सबसे तेजोमय रत्नाभूषण उनके शरीर की महिमा को स्पर्श नहीं कर सकते।

छाडल लखिमी-बिलास किबा लागि तरु-तले बास
अर्थ

उन्होंने देवी लक्ष्मी के साथ अपनी लीलाओं का त्याग कर दिया। अब वे एक वृक्ष के नीचे बैठते हैं।

छादल बन-माला बंशी एबे दण्ड धरिया सन्न्यासी
अर्थ

उन्होंने अपनी बाँसुरी और वनमाला त्याग दी। अब दण्ड धारण करके वे संन्यासी बन गए हैं।

हास अभिलास उपेखि कान्दिया फूलाय दुटी आङ्खि
अर्थ

हास-विलास की लीलाओं से मुख मोड़कर अब वे रोते हैं, उनके नेत्ररूपी खिले फूलों से अश्रु बहते हैं।

बिभूति करिया प्रेम-धन सङ्गे लञा सब अकिञ्चन जन
अर्थ

अब शुद्ध प्रेम का धन ही उनकी एकमात्र सम्पत्ति है। अब वे उन अकिंचन भक्तों के साथ रहते हैं, जिनकी एकमात्र सम्पत्ति कृष्ण हैं।

प्रेम-जले कर-इ सिनान कहे बासु बिदरे पराण
अर्थ

अब वे प्रेम के आँसुओं की झड़ी लगा देते हैं। वासु कहते हैं, मेरे प्राण अब टुकड़े-टुकड़े हो गए हैं।