Vaishnava Songs
नंदग्राम धाम
नंदग्राम धाम वैष्णव भजन · nandgramdham.org/songs/hi
दिखाएँ
टेक्स्ट
देख अद्वैत गुणेर मणि भकति रतन करि बितरण जगते करये धनि
अर्थ

देखो अद्वैत आचार्य को, जो गुणों के रत्न से सुशोभित हैं। वे शुद्ध भक्ति के मूल्यवान रत्न को मुक्त हाथों से बाँटते हैं। इस प्रकार वे सारे संसार को भक्ति के धन से समृद्ध कर देते हैं।

किबा भाबे पुलकित हिया गोरा गोरा बुलि नाचे भुज तुलि घन कङ्खतालि दिया
अर्थ

उनके शरीर के रोम पुलकित हो उठते हैं। उनका हृदय प्रेम की उमंग से अभिभूत हो जाता है। बाहें उठाकर वे 'गौर! गौर!' कहते हुए नाचते हैं।

दुटी नयने आनन्द-धारा पुलक बलित तनु सु-ललित झलके कनक पारा
अर्थ

उनके नेत्रों से आनन्द के अश्रुओं की धारा बहती है। उनके स्वर्ण-सम चमकते शरीर के रोम पुलकित हो उठते हैं।

मुखे झरये अमिया-राशि कि नब भङ्गीते चाहे चारि भिते मधुर मधुर हासि
अर्थ

उनके मुख से अमृत की धारा बहती है। चारों दिशाओं से सब लोग उनकी सुकोमल भाव-भंगिमा और मधुर-मधुर मुस्कान को निहारते हैं।

पहुं बेदि परिकर साजे मधुर सु-स्वरे गाय धीरे धीरे खोल करताल बाजे
अर्थ

अद्वैत आचार्य को चारों ओर से घेरे हुए उनके साथी खोल और करताल बजाते हैं। मधुर स्वर में वे धीरे-धीरे गाते हैं।

ताहा शुनि के धैरज बन्धे दीन हीन यत तांरा उनमत नरहरि पडु धान्दे
अर्थ

उन्हें सुनकर कौन शान्त और स्थिर रह सकता है? दीन पापी भी अब आनन्द से उन्मत्त हो जाते हैं। यह सब देखकर नरहरि दास समझ नहीं पाते कि यह सब कैसे हो रहा है। वे पूर्णतः चकित रह जाते हैं।