Vaishnava Songs
नंदग्राम धाम
नंदग्राम धाम वैष्णव भजन · nandgramdham.org/songs/hi
दिखाएँ
टेक्स्ट
गजेन्द्र-गमने निता-इ चलये मन्थरे यारे देखे तारे भासाय प्रेमेर पाथारे
अर्थ

मनोहर गजराज की तरह भगवान नित्यानन्द धीरे-धीरे चलते हैं। वे जिसे भी देखते हैं, उसे प्रेम के सागर में तैरा देते हैं।

पतित दुर्गत पापीर घरे घरे गिया ब्रह्मार दुर्लभ प्रेम दिछेन याचिया
अर्थ

घर-घर जाकर वे भटके हुए पतित पापियों से विनती करते हैं कि वे उनका प्रेम रूपी सामान खरीद लें। यह ऐसा सामान है जिसे पाना देवता ब्रह्मा के लिए भी कठिन है।

येना लय तारे कय दन्ते तृण धरि आमारे किनिया ल-ओ बल गौर-हरि
अर्थ

अपने दाँतों में तिनका दबाकर भगवान नित्यानन्द कहते हैं, कृपया मेरा सामान ले लो। गौर-हरि बोलकर इसका मूल्य चुकाओ और जो सामान मैं बेच रहा हूँ, उसे ले लो।

तो सबार लागिया कृष्णेर अबतार शुन भा-इ गौराङ्ग सुन्दर नदीयार
अर्थ

हे मेरे भाइयों, कृपया सुनो। नदिया के श्री गौरांगसुंदर स्वयं भगवान कृष्ण ही हैं, वही कृष्ण जो तुम्हारे साथ रहने के लिए इस जगत में अवतरित हुए हैं।

यो पहुं गोकुल-पुरे नन्देर कुमार तो सभार लागि एबे कैल अबतार
अर्थ

वे परम भगवान हैं। वे गोकुलपुर में नन्द के पुत्र हैं, और तुम्हारे साथ रहने के लिए वे इस जगत में अवतरित हुए हैं।

शुनिया कान्दये पापी चरणे धरिया पुलके पूरल अङ्ग गर गर हिया
अर्थ

यह वचन सुनकर पापी रो पड़ते हैं। वे भगवान नित्यानन्द के चरण पकड़ लेते हैं। उनके शरीर के रोम खड़े हो जाते हैं। उनके हृदय प्रेम की उमंग से अभिभूत हो जाते हैं।

तारे कोले करि निता-इ या-इ आन-ठाम हेन मते प्रेमे भासा-ओल पुर ग्राम
अर्थ

भगवान नित्यानन्द उन्हें गले लगाते हैं और फिर अगले घर की ओर चल देते हैं। इस प्रकार भगवान नित्यानन्द ने पूरे के पूरे गाँवों और नगरों को प्रेम के अमृत में तैरा दिया।

देबकीनन्दने बोले मु-इ अभागिया डुबिलुं बिषय-कूपे निता-इ ना भजिया
अर्थ

देवकीनन्दन दास कहते हैं, मैं अत्यंत दुर्भाग्यशाली हूँ। मैंने कभी निताई प्रभु की भक्ति नहीं की। इसीलिए मैं इस भौतिक जीवन के कुएँ में डूब रहा हूँ।