Vaishnava Songs
नंदग्राम धाम
नंदग्राम धाम वैष्णव भजन · nandgramdham.org/songs/hi

गौर नब घन प्रेम धारा बरिषिल

गौर नब-घन प्रेम-धारा बरिषिल तृषित तापित जीब तिरपित भेल
अर्थ

प्रभु गौर के नए मेघ ने प्रेम की धारा बरसाई, ऐसी वर्षा जिसने जलती गर्मी से तपे हुए प्यासे जीवों को तृप्त कर दिया।

दुर्मति कठिन माटी भक्ति-चाषे चूर उपजिल जीब-हृदे प्रेमेर अङ्कुर
अर्थ

भक्ति के हलवाहे ने पापियों के दुष्ट हृदयों की कठोर भूमि को जोता और उसकी कठोरता को तोड़ दिया। फिर उस हलवाहे ने उस भूमि को सींचा। तब प्रेम का पहला अंकुर प्रकट हुआ।

से अङ्कुरे भक्ति-बारि निता-इ सेचिल दिने दिने प्रेम-तरु बाढिया उठिल
अर्थ

प्रभु निताई ने उस अंकुर को भक्ति के जल से सींचा। दिन-प्रतिदिन प्रेम का वृक्ष बढ़ता ही गया।

धरिल प्रेमेर फल सब जीब-तरे अनन्त बण्चित भेल निज कर्म-फेरे
अर्थ

अन्त में उस वृक्ष में प्रेम का फल लगा, ऐसा फल जो हर जीव का उद्धार करता है। हाय! अनन्त दास उस फल को न चख सका। उसके अपने पूर्व कर्म ने उसे उस फल से वंचित कर दिया।

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पद
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