Vaishnava Songs
नंदग्राम धाम
नंदग्राम धाम वैष्णव भजन · nandgramdham.org/songs/hi

गौराङ्ग ठेकिल पके

गौराङ्ग ठेकिल पके भाबेर आबेशे राधा राधा बलि डाके
अर्थ

गौरांग मण्डल बनाकर नाचते हैं। भाव के आवेश में वे 'राधा! राधा!' पुकारते हैं।

सुरधुनी हेरि गोरा यमुना भाणे फुल-बन देखि बृन्दाबन पडे मने
अर्थ

गंगा को देखकर गौर कहते हैं कि यह यमुना है। खिले हुए फूलों का वन देखकर उनके हृदय में वृन्दावन का स्मरण हो आता है।

भाबेर भरमे गोरा त्रिभङ्गिम रहे पीत बसन आर मुरली चाहे
अर्थ

प्रेम के भाव में डूबे गौर एक त्रिभंगी रूप का दर्शन करते हैं, जो पीले वस्त्र पहने है और मुरली लिये है।

प्रिय गदाधर करिया कोले कोथा छिल कोथा छिल गद गद बोले
अर्थ

वे प्रिय गदाधर को अपने वक्ष से लगा लेते हैं। गद्गद और टूटे स्वर में पूछते हैं, 'तुम कहाँ थे? तुम कहाँ थे?'

भाब बुझि पण्डित रहे बाम पाशे ना बुझये ए-इ रङ्ग नरहरि दासे
अर्थ

प्रभु का भाव समझकर गदाधर पण्डित उनके पास ही रहते हैं। परन्तु हाय! नरहरि दास इस आनन्दमय लीला को सीधे नहीं देख सके।

इस भजन के बारे में

पद
5