Vaishnava Songs
नंदग्राम धाम
नंदग्राम धाम वैष्णव भजन · nandgramdham.org/songs/hi

गोबिन्देर अङ्गे पहुं निज अङ्ग दिया

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टेक्स्ट
गोबिन्देर अङ्गे पहुं निज अङ्ग दिया गान बृन्दाबन-गुण आनन्दित हैया
अर्थ

भगवान गोविंद दास के शरीर पर टिक जाते हैं। आनंद से भरकर वे वृन्दावन की महिमा का गान करते हैं।

अनन्त अनङ्ग जिनि देहेर बलनि मुख-चान्द कि कहिब कहिते ना जानि
अर्थ

भगवान का शरीर अनंत कामदेवों को भी पराजित कर देता है। उनके मुख के चंद्रमा का वर्णन मैं कैसे करूं? मुझे तो कुछ कहते नहीं आता।

नाचेन गौराङ्गचान्द गदाधर-रसे गदाधर नाचे पहुं गौराङ्ग-बिलासे
अर्थ

जब गदाधर दिव्य रस-लीला का आस्वादन करते हैं, तब भगवान गौरांगचंद्र नाचते हैं। जब भगवान गौरांग दिव्य रस-लीला का आस्वादन करते हैं, तब गदाधर नाचते हैं।

त्रि-भुबन दरबित दम्पति-रसे मुरारि बञ्चित भेल निज माया-दोषे
अर्थ

तीनों लोक इस दिव्य युगल के प्रति प्रेमोन्माद के अमृत में द्रवित हो जाते हैं। केवल मुरारि द्रवित नहीं होता। वह माया के भ्रम में फंसा होने के कारण वंचित रह जाता है।