Vaishnava Songs
नंदग्राम धाम
नंदग्राम धाम वैष्णव भजन · nandgramdham.org/songs/hi

गोरा दयार अबधि गुण निधि

टेक
गोरा दयार अबधि गुण-निधि सुरधुनी-तीरे नदीया-नगरे गौराङ्ग बिहरे निरबधि
अर्थ

भगवान गौर गुणों के भण्डार हैं। उनकी दया सब दया की चरम सीमा है। नदिया के नगरों में और गंगा के तट पर भगवान गौरांग निरन्तर लीलाएँ करते हैं।

भुज-युग आरोपिया भकतेर कान्धे चलि या-इते ना पारे गोराचान्द हरि हरि कन्दे
अर्थ

वे चलने का प्रयास करते हैं। उनमें ऐसा करने की शक्ति नहीं है। दो भक्तों के कन्धों पर अपनी दोनों भुजाएँ टिकाए हुए भगवान गौरचन्द्र रोते हुए पुकारते हैं, “हरि! हरि!”

प्रेमे छल छल नयन-युगल कत नदी बहे धारे पुलके पूरिल गोरा-कलेबर धरणी धरिते नारे
अर्थ

उनकी आँखों से भावमय प्रेम के आँसुओं की कितनी ही उमड़ती हुई नदियाँ बह रही हैं? उनके शरीर के रोम खड़े हैं। पृथ्वी में उनके गौर रूप को धारण करने की शक्ति नहीं है।

सङ्गे पारिषद फिरे निरन्तर हरि हरि बोल बोले प्रिय-सखार कान्धे भुज-युग दिया हेलिते दुलिते चले
अर्थ

अपने पार्षदों से घिरे हुए वे घूमते और नाचते हैं। वे “हरि! हरिबोल!” पुकारते हैं। दो प्रिय सखाओं के कन्धों पर अपनी भुजाएँ डाले हुए वे डगमगाते हुए चलते हैं।

भुबन भरिया प्रेमे उतरोल पतित-पाबन नाम शुनिया भरसा परमानन्देर मनेते ना लय आन
अर्थ

वे सारे संसार को भावमय दिव्य प्रेम से उद्वेलित कर देते हैं। इसीलिए उनका नाम पतितपावन (पतितों को पवित्र करने वाले) है। उनकी महिमा सुनकर परमानन्द को केवल उन्हीं पर विश्वास है। परमानन्द के हृदय में किसी और प्रकार का विश्वास नहीं टिकता।

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पद
5

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