परश मणिर सङ्गे कि दिब तुलना
मैं भगवान गौरांग को पारस मणि के समान कैसे कहूँ? पारस मणि अपने स्पर्श से वस्तुओं को केवल सोना बना देती है। किन्तु मेरे महिमामय प्रभु गौरांग अपने स्पर्श से कितने ही अमूल्य रत्न बना देते हैं, ऐसे रत्न जो गाते और नाचते भी हैं।
शची के पुत्र स्वयं भगवान कृष्ण हैं, वही भगवान कृष्ण जो वनमाला धारण करते हैं। तीनों लोकों में कोई भी उनके समान नहीं है। मेरे प्रभु गौर वे आराध्य श्रीविग्रह हैं जिनकी मैं अपने हर श्वास के साथ आराधना करता हूँ।
भगवान गौरांग का चन्द्र परम महिमामय है। इस संसार का साधारण चन्द्रमा कलंक के धब्बों से चिह्नित है। इस संसार का कोई भी चन्द्रमा भगवान गौरांग की बराबरी नहीं कर सकता। जब नदिया में भगवान गौरांग का निष्कलंक चन्द्र उदित होता है, तब हर हृदय से अन्धा कर देने वाला अन्धकार भाग जाता है।
न सुरभि गाय और न कल्पवृक्ष ही भगवान गौरांग की बराबरी कर सकते हैं। उनसे वरदान प्राप्त करने से पहले मनुष्य को याचना करनी पड़ती है। किन्तु भगवान गौरांग किसी के माँगे बिना ही सब लोकों को अपने उपहार देते हैं। सचमुच वे स्वयं सबसे याचना करते हैं कि सब लोग कृपा करके उनका भावमय दिव्य प्रेम का उपहार स्वीकार करें।
भगवान गौरांग के समान केवल स्वयं भगवान गौरांग ही हैं। इस पर विचार करके देखो, तुम्हें दिखेगा कि यह सत्य है। परमानन्द के हृदय में यह प्रार्थना बसी है। भगवान गौरांग मुझ पर अपनी दया कब करेंगे?
इस भजन के बारे में
- रचयिता
- परमानन्द दास
- पद
- 5