Vaishnava Songs
नंदग्राम धाम
नंदग्राम धाम वैष्णव भजन · nandgramdham.org/songs/hi

गोरा गेला पूर्ब देश निज गण पा इ क्लेश

गोरा गेला पूर्ब-देश निज-गण पा-इ क्लेश बिलापये कत परकार कान्दे देबी लक्ष्मीप्रिया शुनिते बिदरे हिया दिबसे मानये अन्धकार
अर्थ

अब जब भगवान गौर पूर्व बंगाल चले गए हैं, उनके अन्तरंग साथी दुःख पा रहे हैं। वे कितने प्रकार से विलाप करते हैं? जो भी लक्ष्मीप्रिया देवी का रोना सुनता है, उसका हृदय दो टुकड़े हो जाता है। उसे लगता है कि उजला दिन अचानक आँखों को अन्धा कर देने वाला अँधेरा बन गया है।

टेक
हरि हरि गौराङ्ग बिच्छेद नाहि सहे पुनः से-इ गोरा-मुख देखिया घुचिबे दुख एखान पराण यदि रहे
अर्थ

हाय! हाय! वे भगवान गौरांग का वियोग सह नहीं पातीं। यदि वे एक बार फिर भगवान गौर का मुख देख लें, तो उनके सारे दुःख मिट जाएँ। तब उनके प्राण उनके शरीर में टिके रहें।

शचीर करुणा शुनि कान्दये अखिल प्राणी मालिनी प्रबोध करे ताय नदीया नागरी-गण कान्दे तार अनुक्षण बसन भूषण नाहि भाय
अर्थ

शची का विलाप सुनकर सब प्राणी रोने लगते हैं। मालिनी उन्हें सान्त्वना देने का प्रयास करती हैं। नदिया की स्त्रियाँ पल-पल रोती रहती हैं। उन्हें अपने वस्त्र और आभूषण अब सुहाते नहीं।

सुरधुनी-तीरे या-इते देखिब गौराङ्ग पथे कत दिन हबे शुभ दिन चान्द-मुखेर बाणी शुनि जुडाबे तापित प्राणी गोबिन्द घोषेर देह क्षीण
अर्थ

वह शुभ दिन कितने दिनों बाद आएगा, जिस दिन वे भगवान गौरांग को गंगा के तट के रास्ते पर चलते हुए देखेंगे? उनके चन्द्रमा जैसे मुख से निकले वचन सुनकर जलते हुए जीवों को पता चलेगा कि उनके तपते कष्ट शीतल आनन्द में बदल गए हैं। हाय! अब जब भगवान गौर दूर हैं, गोविन्द घोष का शरीर दुबला होकर क्षीण हो गया है।

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पद
4